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सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार को किया कटघरे में खड़ा

आखिरी सत्र के आखिरी दिन विधायकों ने पर सवाल उठाये
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी सरकार के अंतिम विधानसभा सत्र में सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों ने ही जमकर बवाल काटा। विधायकों ने विशेषाधिकार के मामलों में कार्रवाई न होने पर पीठ पर ही सवाल उठाये। लक्सर विधायक कुंवर प्रणव चैम्पियन तो अपनी बात रखते-रखते वेल तक आ गये। विपक्ष की ओर से आज सत्र शुरू होते ही विशेषाधिकार का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन बाद में सत्तापक्ष के विधायक ही इस मामले में मुखर हो गये।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने विशेषाधिकार का मामला नियम 310 में उठाया। काजी ने कौशल विकास व सेवायोजन मंत्री डा. हरक सिंह रावत के द्वारा सदन में दिये गये रोजगार के आंकड़ों को ही विशेषाधिकार का मुद्दा बनाया।
उन्होंने कहा कि मंत्री ने 2020 में दस लाख रोजगार देने और 2021 में सात लाख रोजगार देने का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने सदन को गुमराह किया है। काजी ने कहा कि सरकार ने सदन ही बेरोजगारों व युवाओं के विशेषाधिकार का हनन किया है।
पीठ पर बैठे विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान इस पर संसदीय कार्यमंत्री से जवाब देने के निर्देश देते रहे, लेकिन इसके तुरंत बात मोर्चा नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने संभाला।
उन्होंने मांग कि सरकार सदन केे भीतर झूठे आंकड़े परोसने के लिए माफी मांगे। इसके बाद गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी मंत्री के जवाब पर विशेषाधिकारर हनन का मामला बनने की बात कही।
संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत ने विपक्ष पर जानबूझकर बात का बतंगड़ बनाने का आरोप लगाया तो विपक्षी विधायक और आक्रामक हो गये।
पीठ की ओर से जैसे ही रोजगार के आंकड़ों का परीक्षण कराने की बात कही गयी तो उसेक बाद सत्तापक्ष के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन ने मोर्चा संभाल लिया।
उन्होंने कहा उन्होंने एक अधिकारी के द्वारा अपने साथ किये गये दुव्र्यवहार का मामला विशेषाधिकारहनन मामले में उठाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चैम्पियन अपने आरोपों पर लगातार मुखर रहते हुए वेल तक पहुंच गये। हालांकि बाद में पीठ ने कहा कि वे वेल से पीछे ही थे। इसी बीच सत्तापक्ष के विधायक राजेश शुक्ला ने भी अपने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा दिया। शुक्ला ने कहा कि उन्हें जिला पंचायत की एक ऐसी बैठक में तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरेआम वेइज्जत किया और तब प्रभारी मंत्री रहे मदन कौशिक ने उनके अपमान को हंसी में उड़ा दिया।
इसके बाद वे बैठक छोडक़र आ गये। शुक्ला लगातार पीठ से यह पूछते रहे कि आखिर उनकी शिकायत पर क्या निर्देश दिये गये, यह बताया जाए।  उन्होंने कहा कि आखिर अब उनकी शिकायत का कब परीक्षण होगा और कार्यवाही कब होगी।
मुन्ना सिंह चौहान ने नोंकझोंक के बीच ही हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इन शिकायतों को कमेटी के हवाले कर दिया जाए। इस बीच उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने कहा कि वे खुद विशेषाधिकार हनन समिति के अध्यक्ष हैं।

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