देवस्थानम बोर्ड को लेकर लोगों में गलतफहमी : महाराज

  • बोर्ड भंग होने की संभावनाएं हो रही हैं क्षीण
  • बिल छपवाकर लोगों में बंटवाएगी सरकार 
  • महाराज ने कहा, हकीकत जानोगे तो करोगे तारीफ 
देहरादून। चार धामों के प्रबंधन के लिए बनाये गये देवस्थानम बोर्ड को
भंग करने की मांग को लेकर जहां एक तरफ तीर्थ पुरोहित आंदोलनरत हैं
वही सरकार इसे बड़े सुधारात्मक कदमों में शुमार करते हुए इसको भंग
करने जैसी किसी बात पर विचार नहीं कर रही। धर्मस्व मंत्री सतपाल
महाराज की बात से कम से कम यह बात साफ हो गयी है। महाराज ने
कहा है कि जब लोग देवस्थानम बोर्ड के बिल की वास्तविकता को समझ
जाएंगे तो इसकी सराहना करेंगे।
महाराज ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि लोग
देवस्थानम बोर्ड को नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने आग्रह भी किया है,
इसको समझें। महाराज ने कहा है कि सरकार देवस्थानम बोर्ड के बिल
को छपवा रही है। माना जा रहा है सरकार बिल छाप पर लोगों को
बंटवाएगी ताकि लोग देवस्थानम बोर्ड की असलियत को खुद ही समझ
सकें और राजनीतिक दल में इसमें किसी को भ्रमित न कर सकें।

महाराज ने कहा है कि बोर्ड बनने के बाद तीर्थ पुरोहितों के हक-हकूकस्पष्ट किये गये हैं। यह पहली बार हुआ है कि उत्तराखंड में तीर्थ पुरोहितोंके अधिकारों को स्पष्ट ही नहीं किया गया बल्कि उनके अधिकारों को भीसुरक्षित किया गया है। महाराज ने कहा है कि इसको जब लोग समझेंगेतो इसकी सराहना करेंगे। उन्होंने हिमाचल का उदाहरण देते हुए कहा हैकि वहां भी वही स्थिति है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर भद्र सिंह ने वहांसभी मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल किया। सरकार में नंबर दो कीहैसियत रखने वाले धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने यह भी कहा कि वोर्डबनाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसके कारण समझना जरूरी है। उन्होंने

कहा है कि यमुनोत्री व गंगोत्री की व्यवस्थाएं कमेटियां चला रही थी, ये
कमेटियां वहां अवस्थापना सुविधाओ का बिलकुल भी विकास नहीं कर
पा रही थी। यमुनोत्री में उसी सडक़ पर घोड़ा चलता है, उसी पर पैदल
जाते हैं, उसी पर डोली जाती है और उसी से शव यात्रा भी चलती है। जैसे-
जैसे उत्तराखंड में रेल की कनेक्टिविटी में बढ़ रही है, आल वेदर रोड बन
गयी है तो यात्रियों की संख्या निरंतर बढ़ गयी है। जबकि हमारे पास
उतनी व्यवस्था नहीं है। इसलिए व्यवस्था का निर्माण करने के लिए चार
धाम प्रबंधम देवस्थानम बोर्ड की आवश्यकता महसूस हुई और इसको
पास किया गया। उल्लेखनीय है कि सरकार ने तीर्थ पुरोहितों के विरोध
के चलते एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बनायी है और कैबिनेट का दर्जा
प्राप्त कमेटी के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं
बोर्ड खत्म नहीं होगा। उधर विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों की ओर से इस
सिर्फ एक ही मांग की जा रही है कि बोर्ड को भंग करके पहले की तरह ही
सब कुछ छोड़ दिया जाए। सारे घटनाक्रम को देखते हुए इस बात की
संभावना अब क्षीण होती जा रही है कि सरकार बोर्ड को भंग करेगी। बोर्ड
की पिछली बैठक में सरकार ने बोर्ड के खाते में 5 0 करोड़ से अधिक की
राशि देने की स्वीकृति दी है। चुनावी वर्ष में बोर्ड के मुद्दे पर राजनीतिक
हमलों से बचने के लिए सरकार बोर्ड के कानून का प्रकाशन कराएगी,
ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे।

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