कैसे मान लूं कि अब नहीं हो तुम बस दिखाई ही तो नहीं देते…
कैसे मान लूं कि अब नहीं हो तुम बस दिखाई ही तो नहीं देते...
वरना, हर तरफ तो तुम ही तुम हो यह ठंडी हवाएं जब छू कर जाती है मुझे यह फूलों की डालिया जब, झुक झुक आती है मुझ पर आसमान से बरसती बारिश की बूंदे जब जब भीगा जाती है मुझे महसूस होता है इन सबो में तुम्हारा ही स्पर्श मुझे दोपहर में जब सूरज की तेज…
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