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तीरतुक्का

अजब रिश्ते-गजब फरिश्ते

इतिहास को पढ़ा कम और कोसा ज्यादा जा रहा है। वे गले में देशभक्त होने का पट्टा डाल कर बाइक में डोलते रहते हैं। ये पट्टा उन्हें नयी ठसक वाली पहचान दे रहा है। कुछ भी कहने या बताने की जरूरत नहीं रहती। वे बेरोजगार हैं। घरवालों को इसकी टीस जरूर होती होगी। लेकिन पट्टाधारी मस्त कलंदर हैं। वे नए दौर के…
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खतरे टूल किट के

बंगलुरु वाली बिटिया दिशा रवि ह्यटूल किटह्य यानी आंदोलन की रणनीति बनाकर गुनाह कर चुकी है। तो सजा भोग रही है। आप इस भैकाल से बचो। अपने अवतारी सेवक पर भरोसा करो, अपने नसीब को ह्यटूल किटह्य बनाओ और प्रभु के गुन गाओ..... वीरेंद्र सेंगर अब वो पहले वाला सहज भारत नहीं रहा। हम खांटी ह्यन्यू इंडियाह्य के…
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नजरिए का लोचा

वीरेंद्र सेंगर ये किस्सा एक केंद्रीय राज्यमंत्री के बंगले का है। समय रहा होगा सुबह दस बजे का। सम्मान देने या मलाई मक्खन लगाने के लिए गांव-गंवई के लोग लक्ष्मण बाजपेई को पीए साहब कहते हैं। बाजपेई जी को साहब कहलाना ज्यादा भाता है। वे अपने अन्नदाता के वास्ते दिन रात तरह-तरह के झूठ बोलते हैं...…
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किसानों की हाए-हाए!

वीरेंद्र सेंगर ग्राउंड जीरो पर डरावने संदेश भी गए, लालच की डोरें भी खींचीं गई लेकिन सब फेल। ऐसे में राष्ट्र भक्तों की टोलियां निकलीं। इन्होंने गालियां देकर भड़ास निकाली, लेकिन सब फुस्स, जुटान बढ़ती गई। किसानों का क्या? वे तो अड़ गए, लेकिन विश्व गुरु बनने वालों के मुल्क को चिंता है... न्यू इंडिया का…
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प्रोटोकॉल कोरोना का!

हे कोरोना! तुम लोकतंत्र में क्या एकदम विश्वास नहीं रखते? तुम्हारी हरकतें तो कुछ ऐसी ही हैं! बिहार के लोगों ने तुम्हें चुनौती दे दी है। वह चुनावी रैलियों में हजारों-लाखों की संख्या में जुटें। उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर मास्क भी नहीं बांधा। 2 गज की दूरी भी नहीं रखी। अब कितनों को मारोगे! हत्यारे कोरोना!…
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ओह! निर्भया!

विरेंद्र सेंगर हम जानते हैं तुम्हारा यह असली नाम नहीं है। तुम बार-बार चीत्कार करोगी, मरोगी भी। मरने के बाद तुम वाकई में निर्भया हो जाओगी। तुमसे सालों पहले राष्ट्रीय राजधानी में कुछ इंसानी राक्षसों ने भयानक दरिंदगी करने के बाद उसे लहूलुहान करके छोड़ दिया था। अंततः उसने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम…
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लोकतंत्र ‘शोर’ के कंधों पर!

इन दिनों संसद से सड़क तक ध्वनि मत का मुद्दा ही जेर-ए-बहस है। हुआ यह कि राज्यसभा यानी सयाने सांसदों के सदन में ध्वनि का ही राष्ट्रीय पंगा हो गया। मनुहार के लिए किसानों को तरह-तरह के लुभावने पैकेज दिये जा रहे हैं। इस साल की एमएसपी महीनों पहले ही बढ़े दामों में घोषित हो गयी। लेकिन हंगामा बरपा है...…
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