घोषणापत्र, आंदोलन और मृगतृष्णा: बिहार की वादों की राजनीति
आफ़रीन हुसैन
एनडीए के रोज़गार के वादों से लेकर महागठबंधन की भाषणबाज़ी और जन सुराज के नए नैरेटिव तक बिहार का मतदाता अब पहले से कहीं ज़्यादा पैनी नज़रों से सवाल पूछ रहा है।
वादों का महोत्सव
जैसे-जैसे बिहार का चुनावी संग्राम तेज़ होता जा रहा है, सड़कों पर नारे, वादे और “नए बिहार” की…
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