देहरादून। उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य पुलिस ने व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया है। दीपम सेठ ने स्पष्ट कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह विशेष अभियान प्रदेश के सभी जनपदों में सर्किल, थाना और चौकी स्तर पर संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट, आश्रम, धर्मशाला, किराये के मकान, फ्लैट, पीजी, होम-स्टे, होटल और गेस्ट हाउस में रहने वाले व्यक्तियों का सत्यापन किया जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर और ब्रोकर के माध्यम से हुए किरायेदारी अनुबंधों की भी जांच होगी। बिना पुलिस सत्यापन किरायेदारी कराने या संदिग्धों को आश्रय देने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
डीजीपी ने बताया कि ई-कॉमर्स डिलीवरी एजेंट, सिक्योरिटी गार्ड, कैब चालक और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत ठेकेदारों का भी विशेष सत्यापन होगा। आधुनिक तकनीक और केंद्रीय डाटाबेस, जैसे नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड, के माध्यम से संदिग्धों की पहचान की जाएगी।
अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों, विशेषकर बांग्लादेशी घुसपैठियों और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी ठहरे विदेशी नागरिकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही मॉल, स्कूल, कोचिंग संस्थान, जिम और अन्य प्रतिष्ठानों में हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी की कार्यशीलता की जांच भी होगी।
वरिष्ठ नागरिकों और अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा का भी मूल्यांकन किया जाएगा। उनके घरेलू सहायकों और ड्राइवरों का अनिवार्य सत्यापन होगा।
अभियान की मॉनिटरिंग थाना स्तर से लेकर आईजी रेंज तक की जाएगी। पुलिस, एसओजी और एसटीएफ मिलकर समन्वित कार्रवाई करेंगे। उत्तराखंड पुलिस का यह कदम प्रदेश में भयमुक्त वातावरण और सुरक्षित समाज की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।