प्रदर्शन से वोट बैंक या जन जागरूकता, कांग्रेस का सड़क का रास्ता कितना सही, 2027 से पहले धार तेज करनी होगी

ममता सिंह
देहरादून। उत्तराखंड में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री आवास घेराव, सड़क जाम, पुलिस से झड़प – सब कुछ हुआ। सवाल है कि क्या ऐसे प्रदर्शनों से वोट बैंक में इजाफा होता है या जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है? और क्या यह कांग्रेस के लिए सही रास्ता है?

प्रदर्शन का दोहरा असर

राजनीति विज्ञान कहता है कि प्रदर्शन का असर दो स्तरों पर होता है। पहला – तात्कालिक वोट बैंक। दूसरा – दीर्घकालिक जनचेतना। उत्तराखंड में कांग्रेस के इस प्रदर्शन में दोनों दिखे।

महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे जनता से सीधे जुड़े हैं। जब कांग्रेस कार्यकर्ता इन मुद्दों को लेकर सड़क पर आते हैं तो आम आदमी को लगता है कि कोई तो है जो उसकी आवाज उठा रहा है। इससे एक नैरेटिव बनता है। 2022 में भी कांग्रेस ने गैरसैंण में महंगाई पर प्रदर्शन किया था, उसका असर 6 सीटों पर देखा गया था जहां कांग्रेस का वोट 4 प्रतिशत बढ़ा था।

लेकिन सिर्फ प्रदर्शन से वोट नहीं मिलता। जनता अब समझदार है। वह देखती है कि प्रदर्शन सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए है या वाकई मुद्दे पर है।

क्या कांग्रेस के लिए सही है?

हां, कांग्रेस के लिए यह प्रदर्शन जरूरी है। तीन साल से कांग्रेस बैकफुट पर थी। भाजपा के पास संगठन, संसाधन, सत्ता सब है। कांग्रेस के पास सिर्फ मुद्दे हैं। यदि वह भी सड़क पर नहीं लड़ेगी तो कार्यकर्ता निराश हो जाएगा। प्रभारी कुमारी सैलजा ने यही समझा है – अटैकिंग कांग्रेस।

लेकिन यह प्रदर्शन सही तभी है जब यह लगातार हो। एक दिन का घेराव करके 6 महीने सो जाना कांग्रेस की पुरानी आदत है। इससे जनता में संदेश जाता है कि यह सिर्फ खानापूर्ति है।

2027 के लिए सलाह – धारदार कैसे बने?

यदि वाकई भाजपा के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करना है तो कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलनी होगी।

1. मुद्दा एक, लड़ाई लंबी: दर्जनों मुद्दे एक साथ नहीं। एक मुद्दा पकड़ो, जैसे बेरोजगारी – उत्तराखंड में 8 लाख पंजीकृत बेरोजगार हैं। इसी पर 13 जिलों में 13 दिन तक लगातार पदयात्रा करो।

2. नेता नहीं, जनता आगे: मंच पर सिर्फ बड़े नेता नहीं, बल्कि प्रभावित किसान, युवा, महिला को बोलने दो। जनता अपनी कहानी सुनेगी तो जुड़ेगी।

3. सोशल मीडिया वार: भाजपा आईटी सेल से लड़ने के लिए हर ब्लॉक में 10 युवाओं की टीम बनाओ जो लाइव वीडियो, रील से प्रदर्शन को गांव-गांव पहुंचाए।

4. फॉलोअप जरूरी: घेराव के बाद हर जिले में ज्ञापन नहीं, बल्कि RTI, कोर्ट, विधानसभा में सवाल।

विधानसभा चुनाव पर असर

इस तरह के आंदोलन का असर 2027 पर जरूर पड़ेगा, लेकिन शर्त है कि यह आंदोलन धारदार हो। यदि कांग्रेस हर महीने एक बड़ा सड़क आंदोलन करती है तो एंटी इनकंबेंसी को हवा मिलेगी और कांग्रेस का वोट बैंक 32 प्रतिशत से 38 प्रतिशत तक जा सकता है। वरना यह प्रदर्शन सिर्फ अखबार की सुर्खी बनकर रह जाएगा और भाजपा को फायदा मिलेगा कि देखो विपक्ष सिर्फ हंगामा करता है, काम हम करते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.