
रुड़की।
राजेंद्र नगर स्थित श्री बालाजी गार्डन में आयोजित भव्य **श्री शिव महापुराण कथा** के पंचम दिवस पर शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरा पंडाल भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और पुष्प वर्षा से गूंज उठा। भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का सजीव दृश्य देखकर भावविभोर होकर उत्सव में भाग लिया।
कथा व्यास **आचार्य गणेश नौटियाल** ने शिव महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शंकर का जीवन चरित्र मानव को ज्ञान, विवेक, सहनशीलता, प्रेम, त्याग, संतोष और संस्कारों की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिव केवल देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति हैं।
माता पार्वती के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य नौटियाल ने समाज को गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि **बेटी घर से कुछ लेने नहीं, बल्कि देने आती है**। यदि माता-पिता बेटी को अच्छे संस्कार देते हैं तो वह विवाह के बाद अपने ससुराल में माता-पिता का यश बढ़ाती है। यह यश ऐसा धन है, जिसे करोड़ों रुपए देकर भी नहीं खरीदा जा सकता।

उन्होंने तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जब बेटी सुचारू रूप से परिवार की जिम्मेदारी निभाती है, सेवा और प्रेम से घर को संवारती है, तब माता-पिता का नाम समाज में उजागर होता है। आचार्य नौटियाल ने समाज में प्रचलित उस सोच पर भी सवाल उठाया, जिसमें बेटे को धन लाने वाला और बेटी को दहेज देने वाली माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है, क्योंकि बेटी जन्म से ही यश, सम्मान और संस्कार लेकर आती है।
कथा में आशीर्वाद लेने पहुंचे **पूर्व मेयर गौरव गोयल** ने भी शिव महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए इसे जीवन को दिशा देने वाला ग्रंथ बताया।
इस अवसर पर **आशा धस्माना, सुनीता सैनी, तुषार धीमान, राजकुमार, आचार्य दिनेश, आचार्य दिवाकर, शकुंतला बिष्ट, मांगेराम सैनी, राजकुमारी** सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
