भक्तों की आस्था ने रचा इतिहास: स्वर्ण जयंती पर बदलेगा सिद्धपीठ सिद्धेश्वर महादेव का स्वरूप

देहरादून।कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा और अटूट आस्था के आगे असंभव भी संभव हो जाता है। देहरादून के केदारपुर क्षेत्र स्थित सिद्धपीठ श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। यह प्राचीन सिद्धपीठ आगामी 4 जनवरी 2026 को अपनी स्वर्ण जयंती मनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर से पहले ही भक्तों की आस्था ने मंदिर को नया, भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान कर दिया है।

भक्तों ने अपने प्रयासों से करीब दो करोड़ रुपये जुटाकर मंदिर का कायाकल्प कर दिया है। पिछले लगभग तीन वर्षों से मंदिर का नवर्निर्माण कार्य चल रहा है, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विशेष बात यह है कि मंदिर के गर्भगृह को उसकी पुरातन पहचान के साथ सुरक्षित रखा गया है, जबकि शेष परिसर को आधुनिक और भव्य स्वरूप दिया गया है। अब सिद्धपीठ का पूरा रंग-रूप पहले से कहीं अधिक आकर्षक नजर आएगा।

चार जनवरी 1976 को यहां स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना हुई थी। तब से लेकर अब तक पचास वर्षों की इस यात्रा में मंदिर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय ऐसा भी था जब आसपास गिने-चुने भवन हुआ करते थे और यह मंदिर दूर से ही अपनी पहचान बना लेता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में क्षेत्र में तेजी से हुए निर्माण के कारण मंदिर इमारतों की ओट में छिपता चला गया। इसके साथ ही समय के प्रभाव से मंदिर की कुछ प्रतिमाएं भी खंडित होने लगी थीं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2023 में मंदिर के नवर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का निर्णय लिया गया। यह पहल किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं, बल्कि स्वयं भक्तों ने आगे बढ़कर की। इस दौरान मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं की नई प्रतिमाएं स्थापित की गईं और बाहरी ढांचे को भी भव्य एवं आकर्षक रूप दिया गया।

मंदिर के पुजारी पंडित कुलदीप खंकरियाल के अनुसार, अब तक नवर्निर्माण कार्य में करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें से लगभग दो करोड़ रुपये भक्तों के सहयोग से एकत्र किए गए हैं। शेष धनराशि विधायक निधि से मिले सहयोग और बैंक ऋण के माध्यम से जुटाई गई है। उनका कहना है कि अपने आराध्य के मंदिर के लिए भक्तों ने जो समर्पण और एकजुटता दिखाई है, वह वास्तव में अनुपम और प्रेरणादायक है।

चार जनवरी 2026 को मंदिर के नवर्निर्माण कार्य का औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा। हालांकि कुछ छोटे-मोटे कार्य इसके बाद भी जारी रहेंगे, जिन्हें पूरा होने में लगभग छह माह का समय लग सकता है। स्वर्ण जयंती समारोह को भव्य बनाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

इस अवसर पर महंत आनंद गिरी जी महाराज को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में विशेष पूजन, रुद्राभिषेक, यज्ञ, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम साबित होगा।

 

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