क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में जबरन गायब किए जाने और लक्षित हत्याओं की घटनाएं चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीते एक महीने के भीतर 106 लोगों को जबरन गायब किया गया, जबकि 42 लोगों की हत्या दर्ज की गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मारे गए लोगों में से 11 ऐसे थे जिन्हें पहले ही लापता किया जा चुका था। वहीं पांच लोग उसी महीने अगवा किए गए थे, जबकि छह अन्य इससे पहले गायब हुए थे। चिंता की बात यह है कि नवंबर में लापता किए गए 12 लोगों को छोड़ दिया गया, लेकिन शेष का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
एचआरसीबी के मुताबिक, सबसे अधिक आरोप पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर पर लगे हैं, जिन पर 60 अपहरणों में संलिप्तता का दावा किया गया है। इसके अलावा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर 23, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) पर 17 और कथित राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड्स पर छह मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।
जिलावार आंकड़ों में केच जिला सबसे अधिक प्रभावित बताया गया है, जहां 20 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्वेटा में 16, पंजगुर और डेरा बुगटी में 14-14, ग्वादर में 10 और कराची में सात मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त मस्तुंग, खुजदार, कोहलू, हब, अवारान, सुराब, चागई और डीजी खान जैसे इलाकों से भी अपहरण की खबरें सामने आई हैं।
नवंबर में दर्ज 42 हत्याओं में 39 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं। इनमें 11 लक्षित हत्याएं, 10 हिरासत में मौत, 10 शव बरामदगी के मामले, चार ऑनर किलिंग, चार हवाई हमले और दो अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाएं शामिल हैं।
इसी बीच केच जिले में एक ही परिवार के चार सदस्यों के कथित अपहरण के विरोध में लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के प्रमुख मार्ग को जाम कर दिया, जिससे कई जिलों में यातायात ठप हो गया। लापता लोगों में दो महिलाएं और एक गर्भवती महिला भी शामिल बताई जा रही हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलूच ने चेतावनी दी कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियां अब एक गंभीर मानवीय संकट बन चुकी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों की आवाज अब अनसुनी नहीं की जानी चाहिए।