वन अपशिष्ट से रोजगार तक, उत्तरकाशी में अनोखा प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित पीरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को स्थानीय संसाधनों के रचनात्मक उपयोग से जोड़ना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।

डायट बड़कोट में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद उत्तरकाशी के सभी विकासखंडों से आए कुल 25 कला अध्यापकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वन अपशिष्ट के रूप में माने जाने वाले पीरूल से उपयोगी और आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें टी-कोस्टर, बास्केट, पेन स्टैंड, बैच, प्लेंटर, सर्विंग ट्रे सहित कई सजावटी व दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण शामिल रहा।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक गोपाल सिंह राणा ने कहा कि पीरूल जैसी वन अपशिष्ट सामग्री का सही उपयोग वनाग्नि की समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट ने प्रतिभागी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान और कौशल को विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों तक अवश्य पहुंचाएं। इससे छात्रों में रचनात्मक सोच, श्रम के प्रति सम्मान और पर्यावरणीय चेतना का विकास होगा। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में वर्णित कौशल आधारित शिक्षा और स्थानीय ज्ञान से जुड़ी शिक्षण पद्धति के अनुरूप है।

कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में विनोद कुमार और मीमा डबराल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतिभागी शिक्षकों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक बताया तथा भविष्य में इस प्रकार के और प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र तथा प्रशिक्षकों को प्रमाण पत्र व प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.