बिहार की राजनीति में नई सरकार के गठन की हलचल तेज़ हो गई है। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने-अपने विधायक दल की बैठकों में नेतृत्व का चयन कर आगे की रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। जदयू के नवनिर्वाचित विधायकों ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में हुई बैठक में सर्वसम्मति से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष **नीतीश कुमार** को एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना। बैठक में सभी विधायकों की उपस्थिति यह संदेश देती है कि पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताती है।
समीक्षा बैठक के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि बिहार की परिस्थितियों में स्थिर सरकार और अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है, जिसे नीतीश कुमार बखूबी पूरा करते आए हैं। वहीं, नीतीश कुमार ने भी संकेत दिया कि वे सत्ता परिवर्तन के इस दौर को बिहार के हित में उपयोग करेंगे और आने वाले समय में नई नीतियों और योजनाओं का विस्तृत रोडमैप पेश करेंगे, ताकि राज्य का विकास और तेज़ किया जा सके।
इधर भाजपा के प्रदेश कार्यालय अटल सभागार में बुधवार सुबह 11:30 बजे विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के सभी 89 विधायक और कई विधान पार्षद उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से **सम्राट चौधरी** को विधायक दल का नेता चुना गया। बैठक के लिए परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। विधायकों का पारंपरिक तिलक और गुलाब पुष्प से स्वागत किया गया, जिसके बाद उनकी उपस्थिति पंजीकृत की गई।
बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े ने की। कई केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिला कि पार्टी नई सरकार की रूपरेखा, मंत्री पदों के बंटवारे और विभागों के आवंटन को लेकर गंभीर मंथन कर रही है। शाम तक राजनीतिक हलचल और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि गृहमंत्री अमित शाह भाजपा नेतृत्व के साथ अलग बैठक में आगे की रणनीति तय करेंगे।
बिहार में गठबंधन की नई तस्वीर और नेतृत्व चयन के साथ राजनीतिक घटनाक्रम अब निर्णायक मोड़ में प्रवेश कर चुका है।