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लालढांग-चिल्लरखाल सड़क को लेकर सीएम धामी का बड़ा बयान, जगी उम्मीदें!

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देहरादून। गढ़वाल और कुमायूं को जोड़ने वाली लालढांग-चिल्लरखाल सड़क, जिसे पहाड़ की लाइफलाइन कहा जाता है, के निर्माण को लेकर अब उम्मीद की किरण नजर आ रही है। राज्य की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सड़क के निर्माण को लेकर गंभीरता से काम करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हर स्तर पर प्रयासरत है और यह मार्ग अवश्य बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि गढ़वाल-कुमायूं के बीच कनेक्टिविटी की धड़कन है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस परियोजना को प्राथमिकता सूची में रख रही है और जल्द ही ठोस प्रगति देखने को मिलेगी।

उधर, इस मार्ग को लेकर चल रहा आंदोलन अब 50वें दिन में प्रवेश कर चुका है। कोटद्वार के युवा प्रवीण थापा ने इस मांग को लेकर कोटद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा की और जंतर-मंतर पर धरना दिया। वहीं, कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के लोग इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने 12 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करने की घोषणा की है।

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हालांकि, आंदोलनकारियों ने नाराजगी जताई है कि अब तक इस जनहित के मुद्दे पर सांसद अनिल बलूनी और विधायक ऋतु खंडूड़ी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।

बेरोजगार संघ के प्रवक्ता प्रमोद काला ने कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल सड़क का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी मांग है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्या का समाधान करना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है, और इस जन आंदोलन का समर्थन करना नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग के बनने से न केवल यात्रा दूरी कम होगी बल्कि आपदा के समय राहत-बचाव कार्यों में भी बड़ी सुविधा होगी। सीएम धामी के आश्वासन ने अब जनता में नई उम्मीद जगा दी है कि शायद इस बार उनकी लाइफलाइन सड़क का सपना पूरा हो सके।

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