अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को चौथा **GE-404 इंजन** सौंप दिया है। यह इंजन स्वदेशी लड़ाकू विमान **एलसीए तेजस मार्क-1ए** में लगाया जाएगा। अब तक भारत को चार इंजन मिल चुके हैं और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 12 इंजन मिलने की उम्मीद है।
एचएएल का लक्ष्य अक्टूबर 2025 तक पहला तेजस मार्क-1ए विमान तैयार करना है। फिलहाल तीन विमान अंतिम परीक्षण की प्रतीक्षा में हैं। इंजन की आपूर्ति को लेकर चल रही दिक्कतें अब दूर होने के बाद उत्पादन में तेजी आने की संभावना है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने फरवरी 2021 में एचएएल के साथ **48 हजार करोड़ रुपये** का अनुबंध किया था। इसमें 73 तेजस मार्क-1ए जेट और 10 ट्रेनर विमान शामिल थे। हालांकि इंजन की आपूर्ति में देरी के कारण वायुसेना को विमान मिलने की समय-सीमा आगे बढ़ गई। मार्च 2025 से इंजन की डिलीवरी शुरू हुई और अब तक चार इंजन HAL को मिल चुके हैं।
एचएएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. डीके सुनील ने बताया कि एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले 113 इंजनों के ऑर्डर के लिए समझौता लगभग तैयार है और अक्टूबर में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 97 नए तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया है, जिनकी डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और छह वर्षों में पूरी होगी।
डॉ. सुनील ने बताया कि नए ऑर्डर में **70% स्वदेशी सामग्री** होगी, जिसमें उपकरण, धातु और स्पेयर पार्ट्स भारतीय निजी क्षेत्र से लिए जाएंगे। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। एचएएल स्वदेशी रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट और अन्य उपकरण भी एकीकृत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि HAL और GE एयरोस्पेस के बीच **F-414 इंजन तकनीक** के 80% हस्तांतरण पर भी बातचीत चल रही है, जो भविष्य के एलसीए मार्क-2 और उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) को शक्ति देंगे।
अब जबकि इंजन की आपूर्ति सुचारु हो रही है, एलसीए तेजस मार्क-1ए के उत्पादन और वायुसेना में शामिल होने की राह तेज हो गई है।