भारत आतंकवाद से जूझते हुए भी बना वैश्विक योगदानकर्ता – जयशंकर का UN भाषण

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुधारों और भारत की जिम्मेदार भूमिका पर स्पष्ट संदेश दिया।

जयशंकर ने कहा कि *“भारत स्वतंत्रता के बाद से लगातार आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है।”* पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि **आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ हमारे पड़ोस में है।** उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया में हुए कई बड़े आतंकी हमलों की जड़ें एक ही देश से जुड़ी हैं और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी सूची में ऐसे कई नाम हैं जो उसी देश के नागरिक हैं।

विदेश मंत्री ने अप्रैल 2025 में **पहलगाम में पर्यटकों की हत्या** की घटना का उल्लेख करते हुए इसे *क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म* का ताजा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज वैश्विक खतरे का रूप ले चुका है, जिसकी जड़ें नफरत, हिंसा और असहिष्णुता में छिपी हैं। ऐसे में *“जब कोई देश आतंकवाद को राज्य नीति बना ले, आतंकी कैंप संचालित करे और आतंकवादियों का महिमामंडन करे, तो उसकी कड़ी निंदा अनिवार्य है।”*

जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आतंकवादी नेटवर्क पर दबाव बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे देशों को छूट दी गई, तो आतंकवाद एक दिन सबके लिए खतरा बन जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने **यूएन सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार** की वकालत की और कहा कि अब समय आ गया है कि इसमें अधिक देशों को स्थायी और अस्थायी सदस्यता दी जाए। उन्होंने कहा कि भारत तैयार है और वैश्विक जिम्मेदारियों को निभाने को तत्पर है।

विदेश मंत्री ने भारत के **वैश्विक योगदान** का भी उल्लेख किया—भूकंप प्रभावित अफगानिस्तान व म्यांमार में त्वरित मदद, अरब सागर में समुद्री डकैती पर रोक, शांति सैनिकों की तैनाती, और दुनिया भर में डॉक्टरों, शिक्षकों, उद्योगों और तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान का जिक्र किया।

अपने संबोधन की शुरुआत में जयशंकर ने कहा— *“भारत के लोगों की ओर से नमस्कार।”* उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति की जड़ *“सहयोग, विकास और शांति”* पर आधारित है।

 

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