न्यूयॉर्क। भारतीय विदेश मंत्री **एस. जयशंकर** ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र के अवसर पर आयोजित **जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक** में आतंकवाद पर दोहरे मानदंड अपनाने वाले देशों पर करारा हमला बोला। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक रुख अपनाना होगा।
बैठक की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका ने की। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था अस्थिर दौर से गुजर रही है, तब जी-20 सदस्य देशों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे दुनिया को स्थिरता और सकारात्मक दिशा प्रदान करें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, *“आतंकवाद विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा है। दुनिया को इसे न तो सहन करना चाहिए और न ही इसे किसी भी रूप में सहयोग देना चाहिए।”*
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि जो भी देश आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं, वे वास्तव में पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सेवा कर रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कई बड़े राष्ट्र आतंकवाद पर अपने हितों के हिसाब से अलग-अलग रुख अपनाते हैं।
इसके बाद जयशंकर ने **ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF)** के एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। यहां उन्होंने बदलती दुनिया की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था को **ग्लोबल वर्क फोर्स** की जरूरत है, लेकिन कई देशों की राष्ट्रीय जनसांख्यिकी इस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रंप** की कड़ी इमिग्रेशन नीति और **एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर शुल्क** जैसे नए कदमों की पृष्ठभूमि में आई है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन स्रोतों पर चिंता रही है, लेकिन अब देशों को **बाजार तक पहुंच की अनिश्चितता** से भी खुद को सुरक्षित करना होगा।
जयशंकर का यह रुख भारत की उस नीति को दोहराता है, जिसमें आतंकवाद पर किसी भी तरह की ढिलाई या राजनीतिक स्वार्थ आधारित दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया जाता।