मिड-डे मील में निकली इल्ली! बच्चों की थाली से निकला लापरवाही का काला सच

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम **बगदरी के सरकारी स्कूल** में मिड-डे मील के दौरान घोर लापरवाही सामने आई है। यहां बच्चों को परोसी गई **खीर में इल्ली** पाई गई। यह न सिर्फ एक चूक, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ का मामला है।

जानकारी के अनुसार, जब बच्चे खीर खा रहे थे, तभी एक छात्र ने अपने निवाले में कीड़ा देखा और तुरंत शिक्षक व प्रबंधन को बताया। शिक्षकों ने बच्चों को खाना बंद कराया, लेकिन तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि **स्कूल प्रबंधन ने घटना को छुपाने की कोशिश की** और इसकी सूचना अभिभावकों तक बच्चों के जरिए पहुंची।

जिम्मेदारी का सवाल
मिड-डे मील प्रभारी सुधीर विश्वकर्मा ने बताया कि यह खाद्य सामग्री हाल ही में विभाग से आई थी। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि सामग्री नई थी, तो उसकी गुणवत्ता जांच कैसे और कब हुई? और यदि पहले से ही घटिया सामग्री भेजी गई थी, तो विभागीय निरीक्षकों और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?

क्वालिटी मॉनिटर टीम मौके पर पहुंची और भोजन के नमूने जांच के लिए लिए गए। लेकिन जांच शुरू होने तक बच्चों का भरोसा और स्वास्थ्य दोनों दांव पर लग चुके थे।

प्रबंधन पर गंभीर आरोप
अभिभावकों का कहना है कि प्रबंधन ने घटना की सूचना तुरंत नहीं दी, बल्कि बच्चों को ही संदेशवाहक बना दिया। यह रवैया न केवल गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि दोषियों को बचाने की मंशा भी दिखाता है। इससे यह संदेश जाता है कि “गलती हुई है, लेकिन दोष उजागर नहीं होने देंगे।”

लापरवाह सिस्टम की पोल
मिड-डे मील का संचालन स्कूल प्रबंधन और विभागीय अधिकारियों की साझा जिम्मेदारी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण महज दिखावा बनकर रह गए हैं। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद हैं।

बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन यह घटना बताती है कि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के **शिक्षा और स्वास्थ्य को राजनीति और बयानबाज़ी** के हवाले छोड़ दिया गया है।

कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और परिजनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर जांच तो होती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नदारद रहती है। यदि यह घटना भी वही पुराना इतिहास दोहराती है, तो यह बच्चों की जान से खिलवाड़ का प्रतीक बनेगी।

यह सिर्फ बगदरी के स्कूल की घटना नहीं है, बल्कि हमारे पूरे **शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र** की चरमराई व्यवस्था का आईना है। अगर अब भी दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह “छोटी लापरवाही” कल किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

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