श्रीरामलीला महोत्सव: रावण-विभीषण की तपस्या से लेकर श्रीराम जन्म तक के दृश्य ने बांधा समां

रुड़की। श्रीरामलीला समिति बीटी गंज, रुड़की द्वारा आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के दूसरे दिन धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। मंचन की शुरुआत रावण, कुंभकर्ण और विभीषण द्वारा ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के दृश्य से हुई। इसके बाद रावण को प्राप्त वरदान से भी संतोष नहीं हुआ और उसने घोर तपस्या शुरू कर दी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने भी उसे वरदान प्रदान किया।

रामलीला मंचन के अगले दृश्य में जनकपुर की झलक दिखाई गई, जहां हल जुताई के दौरान मिथिला नरेश राजा जनक को माता सीता एक मटके में प्राप्त हुईं। राजा जनक ने सीता को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। इस दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे और पूरे पंडाल में मंगल गीतों की गूंज सुनाई दी।

महोत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का रहा। जैसे ही मंच पर रामलला का जन्म हुआ, वैसे ही पंडाल में मौजूद भक्तों ने तालियों और जयकारों से गगनभेदी घोष किया। चारों ओर “जय श्रीराम” और “सिया वर रामचंद्र की जय” के स्वर गूंजने लगे। भक्तों ने इस अवसर पर खुशियां मनाईं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटी।

समिति के पदाधिकारियों और शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को और भी भव्य बना दिया। कार्यक्रम में नितिन गोयल, विनीत सिंघल, डॉ. टेक वल्लभ, सौरभ सिंघल, मनोज अग्रवाल, विशाल गुप्ता, नवनीत गर्ग, प्रदीप परूथी, दीपक शुक्ला, शशिकांत अग्रवाल, अमन अग्रवाल, दीपक तायल, अभिषेक मित्तल, निखिल तायल, वरुण ठकराल, नैतिक सेठी, सुमित चौहान, नमन गोयल और अनुज आत्रे सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

श्रीरामलीला समिति ने जानकारी दी कि आगामी दिनों में भी विविध धार्मिक प्रसंगों का मंचन किया जाएगा, जिसमें राम-सीता विवाह और रावण-वध जैसे मुख्य आकर्षण शामिल होंगे।

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