सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
इंफाल। पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत राज्य मणिपुर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में फंसा हुआ है। जून 2025 में आई भयंकर बाढ़ से अभी परिवार पूरी तरह उबर भी न पाए थे कि सितंबर में लगातार भारी बारिश ने नदियों को उफान पर ला दिया। इंफाल नदी, इरिल नदी, थोउबल नदी और नाम्बुल नदी के जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर, काकचिंग और थोउबल जिलों में हजारों घर जलमग्न हो गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य लापता है। सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय आज भी बंद हैं। बाढ़ के कारण पहले से ही जातीय हिंसा से जूझ रहे इस राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इस साल मणिपुर में यह दूसरी बड़ी बाढ़ है। जून में बांग्लादेश के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण लगातार पांच दिनों तक भारी बारिश हुई, जिससे इंफाल वैली और पहाड़ी इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 56,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए, जबकि गैर-सरकारी अनुमानों के अनुसार करीब 1.65 लाख लोग प्रभावित हुए। 10,477 घर क्षतिग्रस्त हो गए, 115 हेक्टेयर फसलें नष्ट हुईं और 93 जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं। इंफाल पूर्व जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां खुरई, हेइंगांग और चेकॉन इलाकों में नदी किनारों के टूटने से बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ। राज्य सरकार ने 57 राहत शिविर खोले, जहां 720 से अधिक लोगों को स्थानांतरित किया गया। एक व्यक्ति नदी में बह गया, जिसकी तलाश अभी भी जारी है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि जून की तबाही से अभी मलबा साफ भी न हुआ था कि नई बाढ़ ने घरों को फिर से पानी में डुबो दिया। एक प्रभावित परिवार के मुखिया ने कहा, “हमारी जून की यादें अभी ताजा हैं। तब हमने सब कुछ खो दिया, अब फिर वही दर्द। सरकार की मदद आती है, लेकिन देर से।”
14 सितंबर से शुरू हुई लगातार बारिश ने मणिपुर को फिर से हिला दिया। इंफाल पूर्व के लमलाई, नोंगाडा, तिलौ चना और वांगोई विधानसभा क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागने पर मजबूर कर दिया। जेएनआईएमएस अस्पताल का मुख्य द्वार पानी में डूब गया, जिससे मरीजों को निकालना पड़ा और नई भर्ती रोक दी गई। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय, पोरम्पत पुलिस स्टेशन और जिला राजस्व कार्यालय भी जलमग्न हो गए। प्रमुख राजमार्ग कट गए, जबकि भूस्खलन ने इंफाल से कनेक्टिविटी तोड़ दी। वांगोई विधानसभा क्षेत्र में धान के खेत, घर और सड़कें पूरी तरह डूब गईं। थोउबल नदी पर बना फाओनाबा यूनिटी ब्रिज भी बह गया, जिससे यैरिपोक और आसपास के इलाकों में आवागमन ठप हो गया। उखरुल जिले में भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
आज बुधवार को स्थिति में कुछ सुधार के संकेत दिख रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, प्रमुख नदियों का जलस्तर थोड़ा कम हो रहा है, हालांकि इंफाल नदी का स्तर अभी भी बढ़ रहा है। अगले दो दिनों में और बारिश की चेतावनी जारी है। जिलाधिकारियों ने लोगों को बाढ़ग्रस्त नदियों से दूर रहने और बहते पानी में न चलने की सलाह दी है। भारतीय सेना और असम राइफल्स ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। पोरम्पत के खुरई राहत शिविरों में 70 से अधिक विस्थापित परिवारों को पीने का पानी और आवश्यक सामग्री वितरित की गई। शांति खोंगबाल, वाईकेपीआई, सबुनखोक खुनौ और थम्नापोकपी जैसे गांवों में बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं। इंफाल नदी पर खुरई हेइख्रुमाखोंग में सीपेज प्लगिंग का काम फिर से शुरू हो गया है, जबकि मैबम में अर्थ फिलिंग का कार्य प्रगति पर है।
इंफाल पूर्व के एक निवासी ने कहा, “जून में हमने सब खो दिया, अब फिर वही। लेकिन हम मजबूत हैं।” एक अन्य महिला ने बताया, “राहत मिल रही है, लेकिन लंबे समय की योजना चाहिए।” राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावितों के लिए आवेदन प्रारूप जारी किया है, और इथाई बैराज तथा इंफाल-थोउबल बैराज के सभी गेट खुले रखे गए हैं ताकि जलस्तर नियंत्रित रहे। बाढ़ से हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं।