अशासकीय कॉलेजों में वेतन संकट गहराया, अब सड़कों पर उतरेंगे शिक्षक

गढ़वाल यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों और समस्त अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने से बेहद परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब उन्होंने पुनः आंदोलन की राह पकड़ने का मन बना लिया है।

इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को ग्रुटा (गढ़वाल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) की एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता ग्रुटा महासचिव ने की। बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने गहरा रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार द्वारा वेतन की ग्रांट जारी किए जाने के बावजूद उच्च शिक्षा सचिव की ओर से 14 अगस्त के बाद कोई कार्यवाही नहीं की गई। जबकि सचिव स्तर पर पहले आश्वासन दिया गया था कि वेतन जल्द जारी कर दिया जाएगा।

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। लगातार तीन माह से वेतन न मिलने से उनका जीवन यापन कठिन हो गया है। कई परिवारों पर रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का संकट गहराता जा रहा है।

ग्रुटा महासचिव डॉ. डी. के. त्यागी ने शासन से कड़ा अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार तत्काल वेतन जारी करे, अन्यथा आंदोलन अनिवार्य होगा। तय किया गया कि यदि 25 अगस्त 2025 तक भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी आंदोलन शुरू कर देंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

ग्रुटा का कहना है कि यदि कर्मचारियों और शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी। कक्षाएं और परीक्षाएं बाधित होने का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द निर्णायक कदम उठाना होगा।

 

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