देहरादून। उत्तराखंड में मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते राज्य की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। वहीं, मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के लिए भारी से अति भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह ने जानकारी दी है कि आने वाले दिनों में देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से अति भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। साथ ही, इन क्षेत्रों में तेज़ बौछारों के साथ 30 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि अन्य जनपदों में भी हल्की से मध्यम वर्षा के साथ अचानक तेज बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
पिछले 24 घंटों में हुई वर्षा का ब्यौरा
राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बारिश का रिकॉर्ड भी जारी किया गया है।
• देहरादून में 31 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
• पौड़ी में 39.2 मिमी,
• लोहाघाट में 21.8 मिमी,
• मुक्तेश्वर में 18 मिमी,
• जबकि अन्य जिलों में औसतन 7 से 16 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों दोनों में मॉनसून की सक्रियता तेज़ बनी हुई है।
नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई सड़कें बंद
लगातार हो रही वर्षा के चलते राज्य की प्रमुख नदियां जैसे अलकनंदा, मंदाकिनी, गंगा और कोसी का जलस्तर सामान्य से ऊपर जा चुका है। रुद्रप्रयाग और चमोली में कई जगहों पर सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। ऋषिकेश-बद्रीनाथ और गंगोत्री हाइवे के कई हिस्सों में मलबा गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन द्वारा सड़क खोलने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी किनारे जाने से परहेज करें। स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
फसलों और जनजीवन पर असर
लगातार हो रही बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे किसानों को काफी नुकसान का अंदेशा है। धान की रोपाई के लिए बारिश फायदेमंद साबित हो रही है, लेकिन अत्यधिक वर्षा के कारण सब्जियों की फसलें खराब होने की खबरें भी मिल रही हैं। कुछ स्थानों पर पशु आश्रयों में भी पानी घुसने की शिकायतें सामने आई हैं।
बिजली गिरने की घटनाओं की आशंका
मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों या टीन की छतों के नीचे खड़े न हों और बारिश के दौरान घरों में ही सुरक्षित रहें। उत्तरकाशी और चंपावत जैसे जिलों में पिछले वर्षों में बिजली गिरने से जान-माल की क्षति की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए यह चेतावनी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
बरसात के मौसम में जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी की है। स्वच्छ पानी पीने, खुले में खाना न खाने और पानी जमा न होने देने की अपील की गई है। विभाग के अनुसार, इस समय डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और स्किन इंफेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है।
सरकार और प्रशासन सतर्क
राज्य सरकार की ओर से जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों, SDRF और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात रखें। मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार मौसम की स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर तैयार रखे गए हैं।
सुझाव और सावधानियां:
• नदी-नालों के पास न जाएं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सतर्क रखें।
• अनावश्यक यात्रा से बचें, खासकर पहाड़ी मार्गों पर।
• घरों में आवश्यक सामग्री और दवाइयों का संग्रह रखें।
• प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।