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स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं, रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर सख्त कानून जरूरी:नवीन जिंदल

नवीन जिंदल सांसद ने संसद में उठाया अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड तेलों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों का मुद्दा

भुरकुंडा (रामगढ़)। संसद में नवीन जिंदल सांसद ने बुधवार को रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सख्त नियमन, पारदर्शिता और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि जनता को स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार मिले। नवीन जिंदल ने कहा कि रिफाइंड बीज तेलों के दुष्प्रभाव कई अध्ययनों से पता चला है कि बार-बार किए गए रिफाइनिंग प्रोसेस के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और हानिकारक ट्रांस फैट उत्पन्न होते हैं, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्हांने अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के खतरा से अवगत कराते हुए कहा कि खाद्य उत्पादों में अत्यधिक कैमिकल प्रिसरवेटिव और हानिकारक फैट होते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देते हैं। स्पष्ट लेबलिंग की कमी के बावत कहा कि उपभोक्ता अक्सर भ्रामक पैकेजिंग और लेबलिंग के कारण यह समझ ही नहीं पाते कि वे क्या खा रहे हैं। कानूनों को और सख्त करने पर जोर देते हुए श्री जिंदल ने कहा कि स्पष्ट खाद्य लेबलिंग अनिवार्य की जाए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट रूप से बताया जाए कि वे रिफाइंड तेलों का उपयोग करते हैं या अल्ट्रा प्रोसेस्ड श्रेणी में आते हैं। उन्होंने व्हाइट पेपर जारी करने की मांग करते हुए सरकार से रिफाइंड तेल और अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों के स्वास्थ्य पर प्रभावों को लेकर एक वाईट पेपर प्रकाशित करने की मांग की, ताकि इस विषय पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गहन अध्ययन हो सके। नवीन जिंदल ने स्वस्थ विकल्पों के लिए पारंपरिक और कोल्ड-प्रेस्ड तेलों, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना जरूरी है। श्री नवीन जिंदल ने सरकार से उपभोक्ताओं को छिपे हुए स्वास्थ्य खतरों से बचाने और एक प्रभावी खाद्य नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।

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