कोलकाता। पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव से निकलकर युवा वैज्ञानिक साबिर हुसैन ने अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक नवाचार के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। पूर्व बर्दवान जिले के खंडघोष क्षेत्र के बादुलिया गांव के रहने वाले साबिर ने ऐसा विशेष पाउडर विकसित किया है, जो महज 30 सेकंड में रक्तस्राव रोकने में सक्षम है। उनके इस आविष्कार को सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता ‘स्लिंगशॉट 2026’ में बड़ी सफलता मिली है। 29 अक्टूबर को आयोजित इस प्रतियोगिता में साबिर को ग्रैंड विजेता घोषित किया गया।
साबिर के स्टार्टअप ‘मिराक्यूलस’ ने स्वास्थ्य एवं बायोमेडिकल श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ कंपनी को चार लाख सिंगापुर डॉलर की अनुदान राशि भी प्रदान की गई है। उनका यह आविष्कार दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों और आपातकालीन परिस्थितियों में तेजी से रक्तस्राव नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है।
इस तकनीक को एनआईटी राउरकेला के बायोटेक्नोलॉजी एवं मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से विकसित किया गया है। प्रोफेसर देवेंद्र वर्मा के मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस पाउडर का नाम ‘स्टॉप ब्लीड’ रखा गया है।
साबिर के नवाचार को इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। वर्ष 2019 में दिल्ली स्थित डीआरडीओ भवन में उनके आविष्कार के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था। उस समय केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया था।
साबिर ने प्रारंभिक शिक्षा खंडघोष के स्थानीय स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद बर्दवान से उच्च माध्यमिक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कोलकाता के एक कॉलेज से बीटेक और एनआईटी राउरकेला से बायोमेडिकल विषय में एमटेक किया।
‘स्टॉप ब्लीड’ पाउडर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की मंजूरी भी मिल चुकी है। अब तक 250 से अधिक अस्पतालों और कई सैन्य इकाइयों में इसका इस्तेमाल किया जा चुका है।
सिंगापुर में मिली इस सफलता पर एनआईटी राउरकेला प्रबंधन ने भी साबिर को बधाई दी है। गांव से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने वाले साबिर की उपलब्धि देश के युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा बन गई है।
