लोकल मुद्दे गायब, राहुल-खड़गे पर हमला
महेंद्र भट्ट का वन प्वाइंट एजेंडा – सिर्फ राहुल
वंशिका बिष्ट
देहरादून।तस्वीर दो हिस्सों में बंटी है। उधर दिल्ली में रविवार को कांग्रेस की बड़ी रैली में देश भर से लाखों कार्यकर्ता जुटे, इधर उत्तराखंड में भाजपा के नेता विज्ञप्ति के जरिए कांग्रेस पर हमला करने में मशगूल रहे। वही पुराना पैटर्न। भाजपा के प्रवक्ता, मंत्री, दिग्गज नेता, प्रदेश अध्यक्ष सबकी एक ही स्क्रिप्ट – मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऐसा कह दिया, राहुल गांधी विदेश में ऐसा बोल गए, कांग्रेस कॉकरोच पार्टी है।
रोज का यही हाल है। भाजपा नेताओं के लिए यह कोई नई बात नहीं। लेकिन विशेषज्ञ पूछ रहे हैं – चुनाव उत्तराखंड में है, दिल्ली में नहीं। फिर उत्तराखंड में बैठे भाजपाई देश के मुद्दे पर, जिसमें कहीं से भी कांग्रेस टच करती है, तुरंत देहरादून से विज्ञप्ति डालना क्यों शुरू कर देते हैं? आखिर क्यों भाजपा स्थानीय मुद्दों पर बात करने के बजाय बाहर की समस्या का जिक्र करती है?
पिछले एक महीने की विज्ञप्तियों को देखिए
- 15 अक्टूबर – भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी की विज्ञप्ति – “राहुल गांधी ने विदेश में देश का अपमान किया।”
- 22 अक्टूबर – कैबिनेट मंत्री की विज्ञप्ति “खड़गे जी कांग्रेस को डुबा रहे हैं।”
- 28 अक्टूबर – प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की विज्ञप्ति – “कांग्रेस तुष्टिकरण की पार्टी।”
- 2 नवंबर – फिर वही – “राहुल गांधी को पहाड़ का ज्ञान नहीं।”
इन चार विज्ञप्तियों में कहीं भी जोशीमठ दरार, अंकिता भंडारी, पेपर लीक, बेरोजगारी, पलायन, बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर हादसा, महंगाई, स्वास्थ्य का जिक्र नहीं। मुद्दा वही – दिल्ली का।
एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं – “भाजपा के पास देहरादून में एक विज्ञप्ति फैक्ट्री है। दिल्ली में राहुल कुछ बोलते हैं, यहां तुरंत 5 लाइन की विज्ञप्ति तैयार। नीचे लिखा होता है – भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा। बस। यह उत्तराखंड की जनता के साथ मजाक है।”
स्थानीय मुद्दों से क्यों भाग रही है भाजपा?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसके 3 कारण हैं –
लोकल मुद्दों पर जवाब नहीं
उत्तराखंड में आज सबसे बड़े मुद्दे हैं – पलायन, बेरोजगारी, पेपर लीक, अंकिता भंडारी केस में VIP कौन, जोशीमठ-केदारनाथ में दरार, सड़कों की हालत, अस्पताल में डॉक्टर नहीं। इन पर भाजपा बोलेगी तो फंसेगी। क्योंकि 10 साल से सरकार उसी की है। इसलिए बेहतर है राहुल पर बोलो। राहुल सेफ टारगेट है।
हाईकमान को खुश करना
देहरादून से दिल्ली तक विज्ञप्ति भेजने से दिल्ली हाईकमान खुश होता है। दिखता है – “देखो हमारा नेता राहुल पर हमला कर रहा है।” इससे अध्यक्ष की कुर्सी सुरक्षित रहती है। लोकल मुद्दे पर बोलने से हाईकमान नाराज नहीं होगा, लेकिन कोई नोटिस भी नहीं लेगा।
पहाड़ चढ़ने से बचना
महेंद्र भट्ट तो पहाड़ चढ़ते ही नहीं हैं। उनका वन प्वाइंट प्रोग्राम उत्तराखंड के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय प्रदेश के बाहर, खासकर राहुल पर टिप्पणी करना रह गया है। पिछले 6 महीने में महेंद्र भट्ट कितनी बार पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी के दूरस्थ गांव में गए? रिकॉर्ड बताता है – एक बार भी नहीं। वे देहरादून में बैठकर विज्ञप्ति जारी करते हैं। पहाड़ के दर्द पर बोलने के लिए पहाड़ जाना पड़ता है, राहुल पर बोलने के लिए सिर्फ व्हाट्सएप चाहिए।
कांग्रेस का तंज – भाजपा के पास विजन नहीं
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल कहते हैं – “भाजपा के पास उत्तराखंड के लिए कोई विजन नहीं। वे बताएं – 10 साल में कितने युवाओं को नौकरी दी? पलायन क्यों नहीं रुका? जोशीमठ क्यों धंसा? इस पर विज्ञप्ति क्यों नहीं आती? क्योंकि जवाब नहीं है। इसलिए राहुल गांधी का नाम लेकर दिन काट रहे हैं।”
एक आम मतदाता, जो पौड़ी का है, कहता है – “हमने विधायक इसलिए चुना था कि वह सड़क-पानी-बिजली पर बोले। वह राहुल गांधी पर बोल रहा है। राहुल से हमारी सड़क नहीं बनेगी।”
चुनाव उत्तराखंड में, मुद्दा दिल्ली का – कब तक चलेगा?
चुनाव उत्तराखंड में है। दिल्ली में नहीं। उत्तराखंड की जनता पूछ रही है – गैरसैंण राजधानी क्यों नहीं बनी? पहाड़ के स्कूल बंद क्यों हो रहे हैं? हेली सेवा में हादसे क्यों हो रहे हैं? इन पर भाजपा चुप है।
भाजपा की यह रणनीति 2017 और 2022 में चल गई थी – मोदी के नाम पर वोट मिल गया। लेकिन अब 2027 में जनता लोकल मुद्दा पूछ रही है। हर गांव में युवा पूछ रहा है – पेपर लीक का आरोपी कहां है? हर मां पूछ रही है – अंकिता को न्याय कब मिलेगा?
राहुल-खड़गे पर हमला करके भाजपा राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खी तो पा सकती है, लेकिन उत्तराखंड के गांव में वोट नहीं।
आखिर कब तक भाजपा स्थानीय मुद्दों से भागेगी और बाहर की समस्या का जिक्र कर देहरादून से विज्ञप्ति डालती रहेगी? इसका जवाब भाजपा को ही देना होगा, क्योंकि जनता अब विज्ञप्ति नहीं, जवाब चाहती है।
