स्वीकृत धनराशि में सबसे बड़ा हिस्सा यूजेवीएनएल के छह बांधों और बैराजों की सुरक्षा एवं सुदृढ़ीकरण के लिए रखा गया है। विश्व बैंक पोषित परियोजना के तहत इसके लिए 398.30 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं, शहरी स्थानीय निकायों को अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तीसरी तिमाही की किश्त के रूप में 328.28 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाओं को मंजूरी मिली है। चंपावत के दुधौरी में भगवती मेला स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए 58.67 लाख रुपये और अमोड़ी के क्वारसिंह में भगवती दुर्गा मंदिर के विकास के लिए 47.85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पिथौरागढ़ में गुरु गोरखनाथ मंदिर मेला स्थल के विकास के लिए 32.53 लाख और अल्मोड़ा के चलनीछीना स्थित घटीका मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 99.39 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। जसपुर में मंदिरों के सुदृढ़ीकरण के लिए 1.62 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के तहत हरिद्वार में क्षतिग्रस्त एवं कम व्यास वाली सीवर लाइनों को बदलने के लिए दो योजनाओं में क्रमशः 7.65 करोड़ और 6.24 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। देहरादून के धामावाला वार्ड में डिस्पेंसरी रोड से राजा रोड तक सीवर लाइन बदलने के लिए 3.80 करोड़ रुपये तथा रायपुर के चक तुनवाला क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए 9.84 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
इसके अलावा पिथौरागढ़ नगर निगम के कार्यालय भवन के निर्माण के लिए 24.47 करोड़, पूर्णागिरी मेले के लिए सेलागांव में बहुउद्देश्यीय प्रशासनिक भवन के निर्माण के लिए चार करोड़ और रोशनाबाद में आबकारी विभाग के कार्यालय एवं आवासीय भवन के लिए 9.09 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा के रानीखेत क्षेत्र के विभिन्न कार्यों के लिए 1.72 करोड़, उत्तरकाशी के हर्षिल में भवनों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.92 करोड़ और पिथौरागढ़ के डीडीहाट में सीसी मार्ग निर्माण के लिए 74.44 लाख रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की है। इन योजनाओं से प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
