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कबाड़ से रेलवे ने जुटाए 251.92 करोड़, लक्ष्य से 21% आगे

कोलकाता, 19 सितंबर। पूर्व रेलवे ने कबाड़ निपटान के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष तीन जोनल रेलवे में जगह बनाई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में रेलवे ने कबाड़ की बिक्री से 251.92 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह राशि 31 अगस्त तक निर्धारित 207.17 करोड़ रुपये के आनुपातिक लक्ष्य से करीब 21 प्रतिशत अधिक है।

पूर्व रेलवे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए कबाड़ बिक्री का वार्षिक लक्ष्य 565 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें से करीब 45 प्रतिशत लक्ष्य पहले पांच महीनों में ही हासिल कर लिया गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में रेलवे ने 193 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया था। इस लिहाज से इस वर्ष करीब 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

रेलवे ने बताया कि यह उपलब्धि ‘मिशन शून्य कबाड़ संतुलन’ अभियान के तहत किए जा रहे व्यवस्थित प्रयासों का परिणाम है। इसके अंतर्गत कार्यशालाओं, डिपो, शेड, यार्ड और अन्य परिसरों में पड़े पुराने व अनुपयोगी सामान की नियमित पहचान कर पारदर्शी तरीके से नीलामी की जा रही है।

कबाड़ बिक्री से प्राप्त राजस्व में सबसे बड़ा योगदान अप्रचलित इंजीनियरिंग और ट्रैक सामग्री का रहा। करीब 11,500 मीट्रिक टन पुरानी पटरियों के निस्तारण से 28.56 करोड़ रुपये मिले। वहीं, लगभग 29,055 मीट्रिक टन विविध लौह कबाड़ की बिक्री से 100.63 करोड़ रुपये और गैर-लौह कबाड़ से 53.65 करोड़ रुपये की आय हुई।

इसके अलावा 175 अनुपयोगी यात्री डिब्बों की नीलामी से 31.87 करोड़ रुपये तथा 310 मालगाड़ी वैगनों के निस्तारण से 11.82 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

पूर्व रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक संदीप शुक्ला ने कहा कि समय पर कबाड़ की पहचान, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के जरिए पारदर्शी प्रक्रिया ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। अभियान हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा मंडलों के साथ प्रमुख कार्यशालाओं में चलाया जा रहा है।

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने कहा कि कबाड़ निपटान से राजस्व के साथ रेलवे की जमीन और भंडारण क्षेत्र भी खाली हो रहे हैं। इससे स्वच्छता, सुरक्षा और धातुओं के पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिल रहा है।

 

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