गुवाहाटी, 1 अगस्त। असम में बाढ़ का पानी कई इलाकों में उतरने लगा है, लेकिन तबाही का असर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के पांच जिलों में 1,92,799 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में शुक्रवार को दो और लोगों के शव बरामद किए गए। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है।
ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शिवसागर जिले का नेपाली खूंटी गांव बाढ़ की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है। 100 से अधिक परिवारों वाले इस गांव में बाढ़ ने घरों और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई लोग अब राहत शिविरों और ऊंचे स्थानों पर प्लास्टिक के तंबुओं में रहने को मजबूर हैं। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां राहत एवं बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 31 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, धनसिरि नदी नुमलीगढ़ क्षेत्र में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वर्तमान में पांच जिलों के 17 राजस्व मंडलों के 379 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 15,430 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 54 राहत शिविर और 26 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 80 केंद्र सक्रिय रखे हैं। इनमें करीब 12,994 लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 5,384 गैर-शिविर निवासी राहत वितरण केंद्रों से सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
बाढ़ से पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है। करीब 10,855 जानवर प्रभावित हुए हैं, जबकि शिवसागर जिले में 1,461 पशुओं के बह जाने की जानकारी सामने आई है। कई कच्चे-पक्के मकान, झोपड़ियां और मवेशी शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
राहत और बचाव अभियान में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हैं। राज्य में 64 मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा कर रहे हैं। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री और पशु चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।