नेपाल के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित त्रिभुवन विश्वविद्यालय (टीयू) में एमबीए परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के सामने आने के बाद छात्रों में भारी नाराजगी है और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। छात्रों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ प्रबंधन संकाय के डीन और परीक्षा प्रभारी सहायक डीन से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय की स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दो दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूनियन का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं विश्वविद्यालय की साख और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि यह सार्वजनिक किया जाए कि प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
इस बीच नेपाल पुलिस ने प्रश्नपत्र लीक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठन उम्मीद कर रहे हैं कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाएगी।