बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे को लेकर जारी राजनीतिक चर्चाओं के बीच देश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहाबुद्दीन ने किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया। उनका त्यागपत्र संविधान के प्रावधानों के तहत संसद के अध्यक्ष को सौंपा गया, जिसके बाद संसद अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का दायित्व संभाल लिया।
ढाका में पुलिस विभाग के एक सम्मान समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में गृहमंत्री ने कहा कि सरकार को पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई का कोई आधार नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए संवैधानिक दायित्वों से जुड़े फैसलों के लिए उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। हालांकि, यदि कार्यकाल से इतर किसी मामले में आरोप सामने आते हैं तो उनकी जांच कानून के अनुसार की जा सकती है।
सलाहुद्दीन अहमद ने राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर विपक्ष की आलोचना का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में सभी राजनीतिक दलों को अपनी राय रखने और मांग उठाने की स्वतंत्रता है, लेकिन अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसमें कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता हो। उनके अनुसार, शहाबुद्दीन ने संविधान के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और सरकार के साथ पूरा सहयोग किया।
पूर्व राष्ट्रपति से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में केवल मीडिया रिपोर्टें देखी हैं और फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद पूर्व पुलिस महानिरीक्षक बेनजीर अहमद के प्रत्यर्पण के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए गए हैं।
गौरतलब है कि 76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी माना जाता रहा है। वर्ष 2023 में अवामी लीग सरकार के दौरान उन्हें राष्ट्रपति चुना गया था। उनके इस्तीफे के बाद विपक्षी नेशनल सिटिजन पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की है, जिससे बांग्लादेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।