भारत सीमा के पास अमेरिका-बांग्लादेश का सैन्य अभ्यास, क्यों बढ़ी रणनीतिक हलचल?

बांग्लादेश और अमेरिका ने भारत की पूर्वोत्तर सीमा के निकट स्थित सिलहट सैन्य क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘टाइगर लाइटनिंग-2026’ की शुरुआत कर दी है। 13 दिनों तक चलने वाला यह अभ्यास 31 जुलाई तक जारी रहेगा। भारत के मेघालय और असम की सीमा से सटे इलाके में आयोजित होने के कारण इस युद्धाभ्यास को क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांग्लादेश सशस्त्र बलों के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के अनुसार, इस संयुक्त अभ्यास का नेतृत्व बांग्लादेश सेना की पैरा कमांडो ब्रिगेड कर रही है। उद्घाटन समारोह में बांग्लादेश सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद मैनुर रहमान और बांग्लादेश में अमेरिका के राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने इस अभ्यास को सैन्य सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

‘टाइगर लाइटनिंग’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत पहली बार वर्ष 2017 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के दौरान इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू किया गया है। इस बार के अभ्यास में दोनों देशों के कुल 184 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें अमेरिकी सेना की पैसिफिक कमांड और ओरेगन नेशनल गार्ड के 91 जवान, जबकि बांग्लादेश सेना की पैरा कमांडो ब्रिगेड और अन्य इकाइयों के 93 सैनिक शामिल हैं।

सिलहट क्षेत्र भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी और जंगल युद्ध (जंगल ऑपरेशन) से जुड़े प्रशिक्षण को सामरिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका और बांग्लादेश दोनों ने स्पष्ट किया है कि यह नियमित द्विपक्षीय सैन्य सहयोग का हिस्सा है और इसका उद्देश्य सैन्य दक्षता बढ़ाना है।

लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद मैनुर रहमान ने कहा कि इस अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन क्षमता और समन्वय बेहतर होगा। वहीं अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने इसे अमेरिका-बांग्लादेश रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा सुरक्षित, खुले और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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