2027 के चुनावी चक्रव्यूह में सबसे बड़ा मोहरा ‘युवा वोटर’

कांग्रेस का आक्रामक युवा नैरेटिव, क्या भाजपा साध पाएगी युवाओं की ‘गूंज’?

पेपर लीक, बेरोजगारी और रोजगार जैसे मुद्दों पर सियासत तेज

ममता सिंह, देहरादून

भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने उत्तराखंड की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की अनुमति निरस्त होने के बाद बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ को राजनीतिक विश्लेषक युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी के संकेत के रूप में देख रहे हैं। राहुल गांधी ने छात्रों के बीच बैठकर शिक्षा, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर संवाद किया तथा पेपर लीक की घटनाओं को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मामलों को लेकर राज्य की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है। विपक्ष लगातार इन मामलों को सरकार की जवाबदेही से जोड़कर उठाता रहा है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि उसने नकल विरोधी सख्त कानून लागू करने के साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है। इसके बावजूद रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं के बीच असंतोष और बहस का माहौल बना हुआ है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता और विपक्ष द्वारा तैयार किए जा रहे राजनीतिक नैरेटिव का जवाब देने के लिए भाजपा भी अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है। चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी केंद्रीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्री उत्तराखंड के विभिन्न जिलों का दौरा कर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार करने तथा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति पर काम कर सकते हैं।

भाजपा की रणनीति का प्रमुख उद्देश्य सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाकर युवाओं तथा आम मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देना होगा। वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, अग्निवीर योजना और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देकर युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच राजनीतिक मुकाबले का केंद्र युवाओं से जुड़े मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। रोजगार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, शिक्षा और अवसरों से जुड़े प्रश्न चुनावी विमर्श के केंद्र में रहने की संभावना है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती केवल संगठनात्मक मजबूती दिखाने की नहीं, बल्कि युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप ठोस परिणाम प्रस्तुत करने की भी होगी। दूसरी ओर कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।

उत्तराखंड की बदलती राजनीति में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि युवा मतदाता विकास, रोजगार और अवसरों के सवालों पर किस दल के पक्ष में अपना भरोसा जताते हैं। स्पष्ट है कि 2027 के चुनावी मुकाबले में युवा वोटर ही सबसे प्रभावशाली और निर्णायक भूमिका निभाने वाले कारक साबित हो सकते हैं।

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