मनोरंजन की चकाचौंध पर भारी पड़े युवा सरोकार, खराब मौसम में भी उमड़ा जनसैलाब

 

‘छात्रों की गूंज’ से राहुल का सीधा प्रहार, अंकिता भंडारी के परिजनों से की मुलाकात

चुनावी चक्रव्यूह में घिरी भाजपा, दिल्ली के दिग्गज संभालेंगे मोर्चा!

– कृति सिंह, देहरादून

देहरादून में शुक्रवार की शाम राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प रही। एक ओर परेड ग्राउंड के समीप आयोजित लोक संवर्धन पर्व में पंजाबी पॉप सिंगर जैस्मीन सैंडलस का लाइव कॉन्सर्ट युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, वहीं दूसरी ओर बन्नू स्कूल मैदान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं से सीधा संवाद कर रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यही था कि देवभूमि का युवा वर्ग मनोरंजन के ग्लैमर को प्राथमिकता देगा या अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को। हालांकि, तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद राहुल गांधी के कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ ने संकेत दिया कि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों को गंभीरता से सुनना चाहते हैं।

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा, रोजगार और युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाया जाएगा। इसके साथ ही राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के परिजनों से मुलाकात कर न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिबद्धता का संदेश देने का प्रयास किया। इस कदम को कांग्रेस की संवेदनशील राजनीति और जनसरोकारों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी के इस युवा संवाद कार्यक्रम और कांग्रेस के पक्ष में बनते राजनीतिक माहौल ने भाजपा की रणनीति को भी नई चुनौती दी है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सत्ता विरोधी माहौल और कांग्रेस की सक्रियता का मुकाबला करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान उत्तराखंड में केंद्रीय मंत्रियों की बड़ी टीम को सक्रिय करने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्तावित रणनीति के तहत एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्री अलग-अलग जिलों में प्रवास कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का प्रयास करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीति अब तेजी से युवा मतदाताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित होती जा रही है। अग्निवीर योजना, बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों पर युवाओं में असंतोष लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। शुक्रवार को प्रतिकूल मौसम के बावजूद राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी को कई विश्लेषक इसी राजनीतिक रुझान के संकेत के रूप में देख रहे हैं। अब आगामी विधानसभा चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा की संगठनात्मक और केंद्रीय नेतृत्व आधारित रणनीति कांग्रेस द्वारा स्थापित किए जा रहे राजनीतिक नैरेटिव का कितना प्रभावी मुकाबला कर पाती है।

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