मानसून की मार से बढ़ेगी महंगाई! क्या आपकी थाली से दाल-चावल होने वाले हैं महंगे?

देश में मानसून की कमजोर शुरुआत का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। खरीफ सीजन की फसलों की बुआई में कमी आने से आने वाले महीनों में चावल, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो महंगाई का दबाव सीधे आम उपभोक्ताओं की थाली पर दिखाई देगा।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। जून महीने में देशभर में औसतन करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे धान, तूर, उड़द, मूंग, तिलहन और मोटे अनाज जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई। जुलाई के शुरुआती दिनों में कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन इससे शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 738 जिलों में से 44 प्रतिशत से अधिक जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि करीब 10 प्रतिशत जिलों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। रिसर्च एजेंसियों का मानना है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में, जहां सिंचाई की सुविधाएं सीमित हैं, वहां फसलों पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई तक धान की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में 8.63 प्रतिशत कम रही है। इसका असर चावल की कीमतों पर दिखने लगा है। जून में चावल की महंगाई दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत पहुंच गई, जो मई में केवल 0.23 प्रतिशत थी।

दालों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। तूर, उड़द और मूंग की बुआई में क्रमशः 30.29 प्रतिशत, 29.71 प्रतिशत और 10.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, तिलहन की बुआई में भी 21.1 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में खाद्यान्नों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। ऐसे में आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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