डॉ. निशंक के जन्मदिवस पर 200 यूनिट रक्तदान, ‘संवेदना अभियान’ का लिया बड़ा संकल्प

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के जन्मदिवस पर बुधवार को ‘संवेदना अभियान’ के तहत देश के पहले लेखक गांव थानों (देहरादून) में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 200 से अधिक लोगों ने रक्तदान कर मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

यह रक्तदान शिविर हिमालयीय आयुर्वेदिक (पीजी) मेडिकल कॉलेज, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, भागीरथ प्रयास फाउंडेशन, रुड़की तथा देवभूमि ब्लड बैंक, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। शिविर में करीब 200 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जिसे जरूरतमंद मरीजों के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत लेखक गांव स्थित श्री नरसिंह भगवान मंदिर में पूजा-अर्चना और हवन के साथ हुई। इस दौरान डॉ. निशंक ने अपनी पुत्री डॉ. आरुषि निशंक, विदुषी निशंक और अन्य परिजनों के साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण भी किया।

इसके बाद नालंदा पुस्तकालय शोध एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित बाल कवि गोष्ठी में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने डॉ. निशंक की चर्चित बाल रचनाओं ‘भोर की किरण’, ‘बारिश की फुहार’ और ‘प्रकृति का उपहार’ सहित अन्य कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। छात्रों ने संस्कृत में जन्मदिवस गीत प्रस्तुत कर भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई।

अपने संबोधन में डॉ. निशंक ने कहा कि “संवेदना मानव जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है। रक्तदान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सेवा और समर्पण का प्रतीक है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है।” उन्होंने युवाओं से नियमित रक्तदान और समाजसेवा से जुड़ने का आह्वान किया।

रक्तदाताओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हेलमेट भेंट कर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान भविष्य में ‘संवेदना अभियान’ के तहत नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने का भी संकल्प लिया गया।

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