अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटरों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आईसीसी बोर्ड ने इन खिलाड़ियों के लिए चल रहे डेवलपमेंट पाथवे प्रोग्राम को जारी रखने की मंजूरी दी है। साथ ही, वर्ष 2030 तक उन्हें आईसीसी के आधिकारिक क्वालिफिकेशन पाथवे में शामिल करने की दिशा में काम करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है।
आईसीसी की वार्षिक बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। नई टास्क फोर्स में आईसीसी की स्वतंत्र निदेशक डॉ. रोज रिवाज और मुख्य कार्यकारी समिति की सदस्य सारा कीन को शामिल किया गया है। ये दोनों बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाएंगे।
टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटरों के लिए एक मजबूत और दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करना है। इसके तहत खिलाड़ियों को उच्च स्तर की कोचिंग, नियमित प्रतिस्पर्धी मैचों और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का लाभ मिलेगा, ताकि भविष्य में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
डॉ. रोज रिवाज ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों का कौशल विकसित करना नहीं, बल्कि उन्हें क्रिकेट के माध्यम से बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स एक स्पष्ट और टिकाऊ रोडमैप तैयार करेगी, जिससे खिलाड़ियों को लगातार प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का मौका मिलता रहे।
इस कार्यक्रम में केवल क्रिकेट प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग (S&C), फिजियोथेरेपी और पेशेवर फिटनेस सपोर्ट जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा जैसे देशों में रह रही खिलाड़ियों को वहां के स्थानीय क्रिकेट ढांचे से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें नियमित अभ्यास और मैच खेलने का अवसर मिल सके।
आईसीसी के अनुसार, पिछले 12 महीनों में भारत और इंग्लैंड के सफल प्रशिक्षण एवं दौरे इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण रहे हैं। अब इस पहल को और व्यापक बनाते हुए खिलाड़ियों को समूह प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।