रात होते ही चमकने लगते हैं ये रहस्यमयी मशरूम, वैज्ञानिक भी हैरान

मेक्सिको के घने और नम क्लाउड फॉरेस्ट में वैज्ञानिकों ने ऐसे दुर्लभ मशरूम खोजे हैं, जो अंधेरा होते ही हरे रंग की रोशनी बिखेरने लगते हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां पहली बार वैज्ञानिकों के सामने आई हैं। इन मशरूमों की खासियत उनकी जैव-दीप्ति (बायोल्यूमिनसेंस) है, जिसकी वजह से रात के समय पूरा जंगल किसी जादुई दुनिया जैसा नजर आता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इन मशरूमों के भीतर लुसिफेरिन (Luciferin) नामक रासायनिक यौगिक और लुसिफेरेज (Luciferase) नाम का एंजाइम मौजूद होता है। जब दोनों के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, तो ऊर्जा प्रकाश के रूप में निकलती है। इसी प्रक्रिया के कारण मशरूम हल्के हरे रंग में चमकते दिखाई देते हैं। यही वैज्ञानिक सिद्धांत जुगनुओं की चमक के पीछे भी काम करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन मशरूमों की रोशनी दिन में दिखाई नहीं देती, क्योंकि यह बेहद हल्की होती है। लेकिन जैसे ही घना अंधेरा छाता है, इनकी चमक साफ नजर आने लगती है। इन्हें देखने के लिए पूर्ण अंधकार और प्राकृतिक वातावरण की आवश्यकता होती है।

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पश्चिमी मेक्सिको के संरक्षित जंगलों में माइसेना (Mycena) समूह के कई चमकने वाले मशरूम मिले हैं। ये मशरूम आमतौर पर सड़ी-गली लकड़ियों पर उगते हैं और ठंडे व अत्यधिक नम वातावरण में तेजी से विकसित होते हैं। इससे पहले भी मेक्सिको में चमकने वाले मशरूम मिलने के प्रमाण मिले थे, लेकिन इस बार कुछ नई प्रजातियों की पहचान की गई है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन मशरूमों की चमक का एक प्रमुख उद्देश्य कीड़ों को आकर्षित करना हो सकता है। जब कीड़े इनके पास आते हैं, तो मशरूम के सूक्ष्म बीजाणु (Spores) उनके शरीर से चिपक जाते हैं और दूसरे स्थानों तक पहुंचकर नई कॉलोनियां विकसित करने में मदद करते हैं। हालांकि, कुछ शोध यह भी बताते हैं कि सभी चमकने वाले मशरूम समान रूप से कीड़ों को आकर्षित नहीं करते। ऐसे में वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग प्रजातियों में इस रोशनी का वास्तविक उद्देश्य क्या है। यह रहस्य अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है और इस पर शोध जारी है।

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