होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान लगाएगा शुल्क? भारत के लिए आई राहत की खबर

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बड़ा संकेत दिया है। तेहरान ने कहा है कि भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क (सर्विस चार्ज) लिया जा सकता है। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके मित्र देशों के लिए विशेष रियायत या छूट देने पर विचार किया जाएगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संभावित फैसले पर नजरें टिक गई हैं।

चीन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ईरान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले जहाजों से समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लेना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे पारंपरिक टोल टैक्स नहीं, बल्कि समुद्री सेवाओं से जुड़ा सेवा शुल्क माना जाना चाहिए।

हालांकि, ईरान ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह व्यवस्था कब से लागू होगी, शुल्क कितना होगा और किन देशों या जहाजों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, किन मित्र देशों को छूट मिलेगी, इस पर भी कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।

भारत के लिए यह संकेत राहत भरा माना जा रहा है। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि सेवा शुल्क लागू होता है तो भारत को मित्र देश होने के कारण विशेष रियायत मिल सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि ईरान की आधिकारिक नीति सामने आने के बाद ही होगी।

गौरतलब है कि क्षेत्रीय तनाव के दौरान भी ईरान भारतीय जहाजों के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाता रहा है। पहले भी सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय जहाजों को विशेष अनुमति मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। इसके अलावा, ईरान के भारत स्थित राजदूत भी पहले सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भारतीय जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को भरोसे और पारस्परिक हितों पर आधारित बताते हुए सहयोग को लगातार मजबूत बताया था।

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