बांग्लादेश ने TTP का नाम क्यों लिया? पूर्व RAW अधिकारी के दावे ने बढ़ाई हलचल

बांग्लादेश में हाल ही में छह संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बांग्लादेश पुलिस ने इन आरोपियों का संबंध तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से बताया है, लेकिन पूर्व रॉ अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ लकी बिष्ट ने इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन संदिग्धों का वास्तविक संबंध आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट) से हो सकता है और इन्हें टीटीपी से जोड़कर मामले की दिशा बदलने की कोशिश की जा रही है।

बिष्ट ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने दावे में कहा कि 5 जुलाई को ढाका के जात्राबाड़ी इलाके से गिरफ्तार किए गए छह संदिग्ध कथित तौर पर फतह कॉम्बैट सिस्टम नामक संगठन से जुड़े थे। उनके अनुसार, इनका टीटीपी से संबंध बताने का उद्देश्य यह दिखाना हो सकता है कि इनकी गतिविधियां पाकिस्तान तक सीमित थीं, जबकि उनका दावा है कि इनका वास्तविक नेटवर्क आईएसआईएस से जुड़ा था।

पूर्व रॉ अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि इन संदिग्धों का मकसद भविष्य में भारत को निशाना बनाना हो सकता था। उनके अनुसार, टीटीपी का नाम सामने लाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान वास्तविक खतरे से हटाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही बांग्लादेश सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।

बिष्ट ने गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के नाम भी साझा किए हैं। इनमें शाह अमानत साबिर, मो. होसैन तनीम, मो. जुनाएद, अताउल्लाह शाह, मो. आबिदुर रहमान और मो. बायजित शामिल हैं। उनका दावा है कि ये सभी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और कथित तौर पर अफगानिस्तान स्थित उग्रवादी नेटवर्क से भी संपर्क में थे।

फिलहाल बांग्लादेश की अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (CTTC) इकाई उनसे पूछताछ कर रही है। मामले की जांच जारी है और इन आरोपों तथा दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

 

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