नई दिल्ली। भारत में एंटीट्रस्ट जांच को लेकर एप्पल और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के बीच विवाद और गहरा गया है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि सीसीआई की जांच रिपोर्ट स्वतंत्र विश्लेषण पर आधारित नहीं है, बल्कि उसके प्रतिस्पर्धियों के दावों को लगभग हूबहू कॉपी-पेस्ट कर तैयार की गई है। एप्पल ने आयोग से जांच के निष्कर्षों को रद्द करने की मांग करते हुए किसी भी तरह के दंडात्मक या सुधारात्मक कदम का विरोध किया है।
दरअसल, वर्ष 2024 में सीसीआई की जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि एप्पल ने अपने आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप स्टोर के माध्यम से प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन किया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि कंपनी ने ऐप डेवलपर्स के लिए अपने पेमेंट सिस्टम का उपयोग अनिवार्य बनाया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
इन आरोपों पर एप्पल ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि भारत में उसकी बाजार हिस्सेदारी छह प्रतिशत से भी कम है, इसलिए बाजार पर उसका प्रभाव सीमित है। कंपनी का कहना है कि जांच अधिकारियों ने मैच, फोनपे और पेटीएम जैसे प्रतिस्पर्धियों द्वारा लगाए गए आरोपों को बिना स्वतंत्र जांच और सत्यापन के रिपोर्ट में शामिल कर लिया। एप्पल का दावा है कि यह निष्पक्ष जांच प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
कंपनी ने यह भी कहा कि यदि उसे अपने ऐप स्टोर और कारोबारी मॉडल में जबरन बदलाव करने के लिए बाध्य किया गया तो इससे न केवल उसके एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत में निवेश और डिजिटल नवाचार का माहौल भी प्रभावित हो सकता है। एप्पल का मानना है कि ऐसी स्थिति से नियामकीय अनिश्चितता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि इससे पहले गूगल भी इसी तरह के प्रतिस्पर्धा संबंधी मामले में सीसीआई के फैसले को चुनौती दे चुका है। हालांकि आयोग ने गूगल को अपने एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म से जुड़े कई कारोबारी नियमों में बदलाव करने के निर्देश दिए थे।
अब इस बहुचर्चित मामले में 21 जुलाई को सभी पक्षों की बंद कमरे में सुनवाई होगी। इस सुनवाई पर तकनीकी उद्योग और डिजिटल बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन और प्रतिस्पर्धा कानून के भविष्य पर पड़ सकता है।