अब छिप नहीं सकेंगे किडनी ट्रांसप्लांट के नतीजे! अस्पतालों को मिला बड़ा आदेश

नई दिल्ली। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब देश के सभी किडनी ट्रांसप्लांट सेंटरों को अपने ट्रांसप्लांट के नतीजों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक करने होंगे। इसमें मरीजों के जीवित रहने की दर, मृत्यु दर, ग्राफ्ट फेल होने के मामलों और लंबे समय के परिणामों की जानकारी शामिल होगी। इस फैसले का उद्देश्य मरीजों को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अस्पताल चुनने से पहले उसके प्रदर्शन का आकलन कर सकें।

यह निर्देश नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) ने जारी किया है। यह कदम बीजेपी सांसद कैप्टन बृजेश चौटा द्वारा ट्रांसप्लांट के परिणामों में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नॉटटू के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि प्रत्येक ट्रांसप्लांट अस्पताल अपनी वेबसाइट पर ट्रांसप्लांट के बाद के परिणाम प्रमुखता से प्रकाशित करे और राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट रजिस्ट्री में समय पर फॉलो-अप डेटा उपलब्ध कराए।

अस्पतालों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मरीज या उनके परिजनों से सहमति लेने से पहले उन्हें ऑपरेशन की प्रक्रिया, संभावित जोखिम और संभावित परिणामों की पूरी जानकारी दी जाए। इससे मरीज अधिक जागरूक होकर फैसला ले सकेंगे।

हाल ही में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अलीगढ़ की एक महिला के परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। वर्ष 2012 में ऑपरेशन के दौरान महिला की खराब किडनी की जगह स्वस्थ किडनी निकाल दी गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इस मामले ने ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को फिर से उजागर किया।

नए निर्देशों के तहत अस्पतालों को डिस्चार्ज के समय, छह महीने, एक वर्ष, तीन वर्ष और पांच वर्ष बाद तक मरीजों की स्थिति, मृत्यु, ग्राफ्ट फेलियर और फॉलो-अप से बाहर हुए मरीजों की संख्या और प्रतिशत सार्वजनिक करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मरीजों को बेहतर जानकारी मिलेगी और अस्पतालों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों का मूल्यांकन मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम के स्तर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

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