अमरनाथ यात्रा 2026 में पहली बार हाईटेक सुरक्षा, नो फ्लाई जोन से FRS कैमरों तक सख्त निगरानी

नई दिल्ली। 3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने इस बार अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आतंकवादी खतरे को देखते हुए पहली बार हाईटेक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यात्रा मार्ग पर फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से वांछित आतंकवादियों और संदिग्ध लोगों की पहचान की जा सकेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 जुलाई से यात्रा समाप्त होने तक पूरे यात्रा मार्ग को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस अवधि में यात्रा रूट पर किसी भी हेलिकॉप्टर को उड़ान की अनुमति नहीं होगी। यात्रा की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक लाख से अधिक जवान तैनात किए जा रहे हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती मानी जा रही है।

इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी की करीब 670 कंपनियां शामिल हैं। सबसे अधिक जवान सीआरपीएफ के तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, डीजीपी नलिन प्रभात और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नियमित बैठकों के जरिए कर रहे हैं।

यात्रा के दौरान पूरे जम्मू-कश्मीर में होटल, गेस्ट हाउस और अन्य संवेदनशील स्थानों की सघन जांच जारी है। 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाली यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों—पहलगाम और बालटाल—पर थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी। यात्रा मार्ग के दोनों ओर तीन किलोमीटर तक विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया है, जहां केवल सत्यापित लोगों को ही प्रवेश मिलेगा।

पूरे मार्ग पर 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में फेस रिकग्निशन कैमरे शामिल हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं, पोनी संचालकों, पिट्ठू, टैक्सी ऑपरेटरों और फोटोग्राफरों के लिए रियल टाइम वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार किया गया है। सभी को आरएफआईडी और क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र दिए जाएंगे, जिससे उनकी गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखी जा सके।

सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए यात्रा मार्ग पर 28 वॉच टावर, ड्रोन निगरानी और एंटी ड्रोन सिस्टम भी तैनात किए गए हैं। हाल ही में एनएसजी कमांडो ने भी मॉक ड्रिल कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया था।

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