कोयले से बनेगी गैस, सरकार देगी हजारों करोड़ की मदद, जानिए किसे मिलेगा फायदा

 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना लागू कर दी है। हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू कोयले से गैस और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना तथा आयात पर निर्भरता को कम करना है।

सरकार ने योजना के तहत प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली अपनाने का फैसला किया है। इसमें वे कंपनियां अधिक लाभ की पात्र होंगी, जो कम वित्तीय प्रोत्साहन की मांग करेंगी। इस व्यवस्था का मकसद सरकारी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना और अधिक से अधिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना है।

योजना के तहत पात्र परियोजनाओं को संयंत्र एवं मशीनरी की लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, लाभ के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकने के लिए सरकार ने कुछ सीमाएं भी तय की हैं। किसी एक परियोजना को अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये, किसी कॉर्पोरेट समूह को 12,000 करोड़ रुपये तथा अधिकांश डाउनस्ट्रीम उत्पादों के लिए 9,000 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। यूरिया और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी) जैसी कुछ श्रेणियों के लिए अलग प्रावधान बनाए गए हैं।

इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य घरेलू कोयले से सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और एसएनजी जैसे उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार का अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से लगभग 7.5 करोड़ टन कोयले से गैस उत्पादन क्षमता विकसित की जा सकेगी।

यह पहल वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयातित ईंधन पर खर्च कम होगा और रासायनिक तथा उर्वरक उद्योगों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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