16 साल का किशोर दो महीने तक रहा वयस्क जेल में, एक मुलाकात ने बदल दी किस्मत

श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किए गए 16 वर्षीय किशोर को करीब दो माह तक वयस्क कैदियों के बीच जेल में रखने का मामला सामने आया है। उम्र संबंधी दस्तावेजों की जांच में उसके नाबालिग होने की पुष्टि होने के बाद उसे बाल सुधार गृह भेजा गया और अब जमानत मिलने पर रिहा कर दिया गया है। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और गिरफ्तारी के दौरान आयु सत्यापन को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, कोतवाली फेज-2 पुलिस ने 14 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में किशोर को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के समय उसने स्वयं को बालिग बताया था, जिसके आधार पर उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत से न्यायिक हिरासत मिलने के बाद किशोर को वयस्क आरोपियों के साथ जेल भेज दिया गया, जहां वह लगभग दो महीने तक रहा।

मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब वरिष्ठ अधिवक्ता माणिक गुप्ता ने न्यायालय परिसर में किशोर को हथकड़ी में देखा और उससे बातचीत की। बातचीत के दौरान किशोर ने खुद को नाबालिग बताया। इसके बाद अधिवक्ता ने उसके आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज जुटाए और अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों की जांच में किशोर की उम्र 16 वर्ष पाई गई।

अदालत ने उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आठ जून को आदेश जारी करते हुए किशोर को वयस्क जेल से बाल सुधार गृह भेजने के निर्देश दिए। साथ ही जमानत राशि को 45 हजार रुपये से घटाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया। जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत में एक मोटरसाइकिल के दस्तावेज जमा कराए गए।

बृहस्पतिवार शाम सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किशोर को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया। वहीं, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के समय उपलब्ध जानकारी और किशोर के बयान के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की गई थी। अब यह मामला नाबालिगों की पहचान और न्यायिक प्रक्रिया में सतर्कता की आवश्यकता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.