देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड से पहली बार एक मैट्रिक टन प्रीमियम गुणवत्ता की लीची इटली निर्यात की गई। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री ने राजकीय उद्यान, सर्किट हाउस देहरादून से लीची की इस पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर एपीडा के सचिव, महाप्रबंधक, उत्तराखंड के उद्यान निदेशक डॉ. आर.के. सिंह, बागवानी मिशन के निदेशक महेंद्रपाल तथा एपीडा के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इसे राज्य के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे उत्तराखंड की लीची को वैश्विक पहचान मिलने के साथ किसानों को बेहतर बाजार भी उपलब्ध होगा।
वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 5,377 हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती की जाती है और राज्य में प्रतिवर्ष करीब 19,465 मीट्रिक टन लीची का उत्पादन होता है। देहरादून की लीची अपनी विशिष्ट मिठास, आकर्षक लाल रंग, मनमोहक सुगंध और उत्कृष्ट गूदे की गुणवत्ता के कारण देश और विदेश के बाजारों में विशेष पहचान रखती है। यहां रोज सेंटेड, कलकैतिया और बेदाना जैसी लोकप्रिय किस्मों का उत्पादन किया जाता है, जिन्हें उनके विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए काफी पसंद किया जाता है।
राज्य के देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जिले उच्च गुणवत्ता वाली लीची उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इटली को भेजी गई यह पहली खेप भविष्य में अन्य यूरोपीय देशों के बाजारों के लिए भी रास्ते खोल सकती है।
सरकार का कहना है कि इस पहल से किसानों को उनकी उपज का करीब 25 प्रतिशत तक अधिक मूल्य मिलने की संभावना है। साथ ही, निर्यातोन्मुख बागवानी को बढ़ावा मिलने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बागवानी मूल्य श्रृंखला को भी नई गति मिलेगी।