संस्कृति और साहित्य के पुरोधा Dr. Sachchidanand Joshi को ‘मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान’

Rashtrakavi Maithilisharan Gupt Sahitya Samman : भारतीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्प्रतिष्ठित कराने में डॉ. सच्चिदानंद जोशी की महती सहभागिता ने नए मानदंड स्थापित किए है। ऐसे में आपको ‘संस्कृति पुरुष’ के साथ ‘साहित्य मणि’ के रूप में जाना जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी…

ममता सिंह

नई दिल्ली। हिंदी साहित्य, शिक्षा व्यवस्था और भारतीय संस्कृति के संवर्धन में अप्रतिम योगदान देने वाले मूर्धन्य साहित्यकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान’ (Rashtrakavi Maithilisharan Gupt Sahitya Samman) प्रदान किए जाने की खबर से साहित्य और कला जगत में अत्यंत हर्ष व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि भारतीय संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्प्रतिष्ठित कराने में उनकी महती सहभागिता ने नए मानदंड स्थापित किए हैं।

अपनी बहुआयामी लेखनी, वैचारिक स्पष्टता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले Dr. Sachchidanand Joshi का साहित्यिक एवं अकादमिक जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने न केवल जनसंचार, इतिहास और नीति-निर्माण के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, बल्कि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलसचिव (रजिस्ट्रार) भी रहे, और वहीं उन्होंने संकाय अध्यक्ष (अकादमिक) के रूप में भी कार्य किया।

मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान खड़ी बोली हिंदी साहित्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक रचनात्मक योगदान, भाषाई उत्कृष्टता और समूचे कृतित्व के मूल्यांकन के आधार पर प्रदान किया जाता है। डॉ. जोशी की पुस्तकें, काव्य संग्रह तथा मीडिया और संस्कृति पर दिए गए व्याख्यान भारतीय मूल्यों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं।

साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद जोशी को प्रतिष्ठित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से अलंकृत होने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ लेखक, विचारक और प्रशंसक उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। यह सम्मान केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति का भी सम्मान है।

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