देहरादून। मानसून सीजन की दस्तक से पहले देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। संभावित आपदाओं, भूस्खलन और जलभराव की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गुरुवार को जिला कार्यालय सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने की, जबकि जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने संवेदनशील स्थलों पर की गई व्यवस्थाओं, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में संचालित शमन कार्यों तथा गत वर्ष आई आपदाओं और जलभराव की घटनाओं से मिले अनुभवों के आधार पर किए गए सुधारात्मक उपायों की जानकारी दी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार मानसून के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार की गई है।
समीक्षा बैठक में सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई अभियान तथा बाढ़ सुरक्षा से संबंधित अन्य परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के सक्रिय होने से पहले सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
उन्होंने खनन गतिविधियों से जुड़े लंबित मामलों को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जिले में उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पंपों को ऐसे स्थानों पर पहले से तैनात रखा जाए, जहां बारिश के दौरान जलजमाव की आशंका अधिक रहती है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि मानसून के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना तंत्र और संवेदनशील क्षेत्रों में अग्रिम तैयारी ही आपदा प्रबंधन की सफलता की कुंजी होगी। प्रशासन ने नागरिकों से भी सतर्क रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।