हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश: किसानों और सरकार की साझेदारी से बदलेगी झारखंड की तकदीर

रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय ‘झारखंड कृषि उत्पाद एवं व्यापार मेला-2026’ का शुभारंभ मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के विकास की असली ताकत उसके किसान हैं और सरकार तथा किसानों के संयुक्त प्रयासों से राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और स्वतंत्रता के बाद देश के विकास की परिकल्पना भी किसान और कृषि क्षेत्र को केंद्र में रखकर की गई थी। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आधारशिला है। खेती ने ही मानव समाज को स्थायित्व प्रदान किया और संगठित सामाजिक व्यवस्था के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि किसानों के अथक परिश्रम के कारण ही आज भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की लगभग 80 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को मजबूत किए बिना राज्य के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन और जल संकट को कृषि क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि लगातार बदलते मौसम और घटते जलस्तर के कारण खेती पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। यदि समय रहते जल संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए संकट गहरा सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भू-जल का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, लेकिन उसके पुनर्भरण की दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों और आम नागरिकों से अपील की कि वे रिचार्ज पिट, सोक पिट और जल संचयन की अन्य व्यवस्थाओं को अपनाकर भू-जल संरक्षण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई हो रही है और शहर तेजी से कंक्रीट के जंगलों में बदल रहे हैं। यदि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पानी, जंगल और हरियाली केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं हैं, बल्कि कृषि, पशुपालन और मानव जीवन की बुनियाद हैं।

उन्होंने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। योजना के तहत लगभग डेढ़ लाख एकड़ बंजर भूमि पर फलदार पौधों का रोपण किया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ी महिलाओं की सफलता का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि सिमडेगा जिले की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित आम अब यूनाइटेड किंगडम तक निर्यात किए जा रहे हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि किसानों और ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना सकते हैं।

कृषि उत्पादन की गुणवत्ता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक लाभ के लिए रसायनों का प्रयोग मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में कई नई योजनाओं और प्रोत्साहन कार्यक्रमों पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में किसानों, गरीब परिवारों और ग्रामीण समुदायों के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव अब दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास में किसानों की भूमिका केंद्रीय है और सरकार उनके उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और किसान आधुनिक सोच के साथ खेती को आगे बढ़ाएं, तो झारखंड कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

16 से 18 जून तक चलने वाले इस कृषि एवं व्यापार मेले में राज्य भर के प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और उद्यमियों को एक साझा मंच मिला है। मेले में लगभग 200 सरकारी और गैर-सरकारी स्टॉल लगाए गए हैं, जहां आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, बागवानी, पशुपालन, कृषि यंत्रों और कृषि आधारित उद्योगों की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा ‘बिरसा कृषि रथ-2026’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कृषि मेले को राज्य में कृषि विकास और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

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