रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने समाज में अंग एवं ऊतक दान के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दे सकता है और अनेक परिवारों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकता है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को रांची के बारियातू रोड स्थित एक होटल में मोहन फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज इन ऑर्गन एंड टिश्यू डोनेशन’ कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि अंगदान से जुड़े कानूनी प्रावधानों, प्रक्रियाओं और इसके महत्व की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। समाज में आज भी अंगदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं, जिन्हें जागरूकता अभियानों के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए।
हेमंत सोरेन ने कहा कि अस्पतालों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को अंगदान की प्रक्रिया और उसके महत्व के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए। इससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनरक्षक अंग उपलब्ध हो सकेंगे और कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से प्रगति कर रहा है। रोबोटिक सर्जरी, किडनी प्रत्यारोपण, लिवर ट्रांसप्लांट और अन्य आधुनिक तकनीकों ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। झारखंड सरकार भी राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने मोहन फाउंडेशन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और अंगदान जैसे मानवीय विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य संस्थानों और नागरिकों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं और जरूरतमंदों को नया जीवन मिल सके।