अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी डर कायम, बड़ी शिपिंग कंपनी ने क्यों रोके जहाज?

 टोक्यो। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बावजूद वैश्विक समुद्री व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है। दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों में शामिल जापान की मित्सुई ओएसके लाइन्स (एमओएल) ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते अपने जहाजों का संचालन शुरू नहीं करेगी। कंपनी का कहना है कि केवल समझौते की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्षेत्र में वास्तविक सुरक्षा स्थिति में सुधार दिखना भी जरूरी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एमओएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोतारो तमूरा ने कहा कि शिपिंग कंपनियां तब तक इंतजार करेंगी, जब तक उन्हें यह भरोसा नहीं हो जाता कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता जमीन पर भी प्रभावी साबित हो रहा है। उनके अनुसार, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित होने के बाद ही जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करने पर विचार किया जाएगा।

तमूरा ने कहा कि केवल राजनीतिक स्तर पर समझौता हो जाना पर्याप्त नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वास्तविक हालात सामान्य हों और जहाजों के सुरक्षित आवागमन की गारंटी मिले। उन्होंने संकेत दिया कि तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की नियमित आवाजाही शुरू होने में अभी कई सप्ताह लग सकते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि होर्मुज मार्ग अब पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य हो गया है। हालांकि, शिपिंग उद्योग अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए है। फरवरी के अंत से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगभग बंद रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

मित्सुई ओएसके लाइन्स दुनिया की सबसे बड़ी टैंकर ऑपरेटिंग कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी के बेड़े में 900 से अधिक जहाज शामिल हैं, जिनमें 200 से ज्यादा जहाज कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और रसायनों के परिवहन में लगे हुए हैं। ऐसे में एमओएल का यह निर्णय वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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