‘घर को कंक्रीट, शहर को हरित सीमाएँ चाहिए’— पद्मश्री डॉ. संजय का अनोखा संदेश चर्चा में

 देहरादून/सिलचर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) सिलचर में “स्मार्ट सिटी निर्माण एवं शहरी नियोजन में पर्यावरणीय स्थिरता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और भविष्य के सुरक्षित शहरों के निर्माण पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, एनआईटी सिलचर तथा द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के सिलचर लोकल सेंटर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत वृक्षारोपण के साथ हुई। इस अवसर पर सांसद Parimal Suklabaidya, एनआईटी सिलचर के निदेशक D. K. Baidya तथा पद्मश्री B. K. S. Sanjay सहित कई शिक्षाविद, शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय ने “सुरक्षित शहर, स्वस्थ जीवन: सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षित सड़कें और सतत शहरी अवसंरचना का एकीकरण” विषय पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ हवा, हरित क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण आवास और संतुलित शहरी विकास से भी जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी घर को सुरक्षा और मजबूती के लिए कंक्रीट की सीमाओं की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार शहरों को पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए हरित सीमाओं की जरूरत होती है। उनके अनुसार शहरी वन और हरित पट्टियां शहरों के “फेफड़े” हैं, जो प्रदूषण को कम करने और लोगों को स्वस्थ जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डॉ. संजय ने चेतावनी दी कि अनियोजित शहरीकरण, बढ़ती भीड़भाड़ और अतिक्रमण सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक शहरी नियोजन, हरित क्षेत्रों के संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल अवसंरचना और सतत परिवहन प्रणाली को समय की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक हरित, सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ शहरों का निर्माण किया जाएगा।

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